शराब मुक्त उत्तराखण्ड बणौंणा मा टिंचरी माई कु योगदान
नसा की लत या जकड़ मा अजकाळ सिर्फ बुढ्या ही नी डूब्याँ छन, बल्कि नई पीढ़ी कु हाल देखी र्वे औंण च। कखि बि द्याखा, दूद पिणा उमर म नौंना (बच्चा) बि नसा का आदि दिख्येणा छन। जै उमर मा योन दूद, घ्यूं का गिलास भोरि-भोरि पिणा छायीं, वे उमर मा सी दारू का गिलास हडकडां छन।
कई संगठन अज्काल ‘नशा मुक्त उत्तराखण्ड’ बणौंण मा अपणु योगदान देंणा छन। जै पर यीं संस्था वलोन बि अबि तक क्वीं जादा काम नी कै साकी। नई पीढ़ी नशा की आदि न हो, यांका वास्ता सर्या कुटुम्दरि (परिवार) तैं समझोंणे की जरुरत च, जै से एक अच्छु समाज बणि सक्यां। जब हम उत्तराखंड मा नशा विरोधी आंदोलन की बात करदो, त सबसे पैलि नौं आंद इच्छागिरी माई कु।
‘कु छायीं इच्छागिरी माई’
टिंचरी माई कु जनम थलीसैंण तहसील का मंज्यूर गौं मा साल 1917मा ह्वे छायीं। ऊंको बचपन कु नौं ‘दीपा’ छायीं।
दीपा जब द्वी सालै छायीं तब वींकि ब्वे अर पाँच सालै उमर मा बुबा की मिरत्यु ह्वेग्ये।
सात सालै उमर मा दीपा कु ब्यौ चौन्दकोटा मा गवाणी गौं का रैवासी गणेश दगड़ि ह्वेग्ये। गणेश ब्रिटिश फौज मा छायीं। उबरि ऊकीं नौकरि रावलपिंडी मा छायीं। दीपा अपणा जवैं क दगड़ि रावलपिड़ी चलिग्ये, पर भगवान तैं कुछ हौरि मंजूर छायीं। दीपा उन्नीस सालै उमर मा व विधवा ह्वेग्ये।
यांका बाद दीपन संन्यास ल्यायी। संन्यास लिंणा बाद वींथै नौं मिलि ‘इच्छागिरी माई’। तब बिटि माई जीन अपणि सर्या जिन्दगि समाजै भलाई का वास्ता लगै द्यायी।
जब नेहरू जी का समणि खड़ी ह्वेग्ये माई जी
एकदा माई जी सिगड़ी भाबर (कोटद्वार) गौं मा पौंछि, अर वख उन्न अपणा रैंणा वास्ता एक झोपड़ि बणै। वे बगत सिगड़ी मा पाणि की भारि दिक्कत छायीं। पाणि का वास्ता ब्यटुला अर नौनियों तैं बौत दूर जाण पड़दु छायीं। यांका वास्ता माई जीन प्रशासन तैं कतगै बार बतै, पर कैन बि यीं दिक्कत तैं हल नीं कायी।
प्रशासन की लापरवै देखिकि माई जी दिल्ली चलिग्ये अर सीधे प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का घौर का भैर बैठिग्यायी। एक दिन जब प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू अपणा काफिला दगड़ि जाणा छायीं, त माई जी नेहरू जी का समणि खड़ी ह्वेग्ये। तब नेहरू जी न माई जी से ऊंकी दिक्कता का बारम पूछि। माई जी न अपणा गौं की पाणि की दिक्कत बतै, प्रधानमंत्री न भरोसु द्यायी, अर एक दिन गौं मा पाणि औंण बठिग्ये।
मोटाढाक मा इस्कुल बणौंण कु काम-
सिगड़ी गौं का बाद माई जी मोटाढाक चलिग्यायी। जख माई तैं पता चलि कि यख गौं मा क्वीं बि प्राथमिक इस्कुल नी च। माई जी न तय कायी कि वु नौनों खुणि इस्कुल बणैकि रळी। उन्न अपड़ा जमा पैसा अर चंदा इकठ्ठा कायी अर इस्कुल वास्ता भवन बणौंण कु काम सुरु कायी। माई जी की मेहनत से छै मैना मा इस्कुल बणि क त्यार ह्वेग्यायी। याका बाद माई जी पौड़ी तरफ चलिग्ये।
उत्तराखंड मा शराब विरोधी आन्दोलन अर माई जी कु रौद्र रूप
उत्तराखण्ड मा दशक 60 मा शराब खिलाप आन्दोलन की शुरूवात ह्वे छायीं। तब शराब माफियौंन दवै की सीसी मा शराब भोरिकि बेचण सुरु कै द्यायी, जैका चपेटम सर्या पाड़ै ज्वान पीढ़ि ऐग्ये।
यन हालात मा जब परिवार क परिवार अर औलाद की औलाद नसाम डूबण बैठिग्येन, अर सर्या कुटुम्दरि कु सुख-चैन खतम हूंण बिठिग्ये। गौं-धार मा अब्यवस्था फैलण बैठिगे। कजै शराब का आदी बणिग्ये अर क्वीं समझाण वलु घार मा नि रेग्ये। तब घार का ब्यटुला अर हर नौंनि न शराब का खिलाप आन्दोलन सुरु कायी। शराब माफियाें का खिलाप लाठु निकालि अर शराब कु बिरोध शुरू कायी। शराब का बिरोध मा सर्या पौड़ी मा नौनियाेंन प्रशासन कु नाक मा दम करि द्यायी।
तब शराब बड़ा लोगुकि जागीरदारी जनि समझि जयेन्दि छायीं। पक्की दराम (दारू) त फौजि लोगु मा रैन्दि छायीं या शराब माफियों मा हि मिलदि छै।
ये दौरान पौड़ी मा इच्छागिरि माई भी आन्दोलन मा गौं का ब्यटुला का दगड़ि सामिल ह्वेग्ये। एक दिन माईजीन एक मनखि तैं ‘टिंचरी’ (कच्ची शराब) पैकि बुरी हालत मा देखि। मनखि की दुर्दशा नी दिखिकि माई जी तैं भौत दुख ह्वे।
एकदा माई जी पौड़ी डाकखाना मा गायी, जख उन्न देखी कि शराबै दुकानि का समणि कुछ लोग शराब पेकि औंण-जाण वलि घसेरियों (घास काटने वाली महिलाओं) दगड़ि छेड़ि करणा छन। या बात माई जी तैं कतै बरदास नी ह्वे। यांका बाद माई जी सीधा पौड़ी डीएम का यख पौंछिग्ये, अर डीएम तैं हत्थ पकड़ि की शराब दुकनि की तक ल्यायी।
नराज माई जी डीएम खुणि बोलि ‘अबि बंद कारा यीं दुकनि तैं!’
डीएम न बोलि ‘दुकनि कु लाइसेंस च, इथैं बंद करणा म बगत लगलु।’
माई जी बोलि बोलि ‘बडु साहब बणदि, अर एक दुकान तैं बंद नी कै सकदि? दुकान अबि बंद नीं होलि त मिन दुकनि मा आग लगै दिंण। तब तू मिथैं जेल भेज दे!’
माई जी न बोलि ‘जान दे द्यूलु पर टिंचरी बिकण नी द्यूलु।’
जन्नि डीएम वख बिटि गायी, उन्नि माई न एक कंटर मिट्टी तेल कु बन्दुबस्त कायी अर दुकनि मा पौंछि। शराब पैंण वलौन डर का मारि दुकनि का भितर बिटि बंद कै द्यायी। माई न दुकान ख्वलण खुणि बोलि पर उन्न द्वार नी खोलि। तब माई न एक बडु ढूंगु (पत्थर) मारिकि द्वार तोड़ि दे। दुकनि भितर बिटि सबि दरवल्यां (शराबी) भागी ग्यीं।
माई बोलि ‘कैमा हिकमत च, त रोक ल्यावा!’ अर मिट्टी तेल डालिकि दुकनि मा आग लगै दे।
आग लगै कि माई सीधा डीएम का घौर पौंछिग्ये अर बोलिकि ‘मिन दुकनि मा आग लगै द्यायी, अब मितैं गिरप्तार कै द्यावा।’ अर माई वखि बैठी ग्यायी। जब कमिश्नर न माईजी से पूछि कि तुमन यनु गलत काम किलै कायी, त माईजीन निडर ह्वेकि बोलि! ‘यन काम त मि हरेक दिन करलु।’
वे दिन बटिन पौड़ी मा माई जी की डैर से शराब माफियों कि हालत खराब ह्वेग्यायी। अर ‘इच्छागिरि माई’ तैं दुन्या ‘टिंचरी माई’ का नौं से जणण बैठिग्ये।
