देवभूमि: चुनौती अर जिम्मबरि
सर्या देसम उत्तराखण्डा अपणि सांप्रदायिक सौहार्द, आपसी भै-भ्यात, पाड़ै संस्कृति, अर धार्मिक सहिष्णुता वास्ता पछ्याँण, जांद। पर अबि पिछल कुछ सालु बटि घटि घटना प्रदेस अन्वार तैं खराब करणि छन। जैमा सहसपुर बैरागी वाला बड़ी घटना च। बैरागी वाला घटना मा जु बि ह्वे प्रदेसा वास्ता बौत नखरि घटना च। देरादूण बैरागीवाला की या घटना सभ्य समाज तैं झकव्लणि च। एक छ्वटु सी विवाद (पुगड़ा मा पाणि लगौंण से) जैमा एक मनखि की जान हि नी चलिग्ये बल सर्या क्षेत्रा भै-भ्यातै परंपरा फर बि घाव कै ग्यायी। लाट्ठा, कुटळा अर हथौंणन हमला कैकि एक मनखि कु कतल हूंद त, यु सीधु कानून बन्दुबस्त तैं चुनौती च। कैका घार म जैकि ब्यटुला दगड़ि मारपिटै करणु अपराधिक मानसिक तैं बि बतौंदु। ये मामला मा जु बि दोषि छन ऊतैं कड़ी से कड़ी सजा मिलण चैंद।
घटना बौत गंभीर अर चितौंण वलि च, पर या से जादा चिंतै बात च कि घटना की जांच से पैलि कि घटना तैं एक एक खास धरम से ज्वड़णा की कोसिस सुरु ह्वेग्यायी। कैबि समाजम क्वीं बि घटना, एक-दुसर दगड़ि बेर, द्वियौं का बीच पैसौं का कारण ह्वे सकदन। इन्ना मामला मा जु बि दोषी छन पैलि वैंकी पछ्याण हूंण चैंद, वैकु धमर क्य च, यांकी ना। अगर हम हरेक बात मा सांप्रदायिक रंग देंणा कोसिस करला त समाजम तनाव हौरि बढ़लु अर लोगुक ज्यूं मा एक दूसर कु मान कम ह्वे जालु, विस्वास कम ह्वे जालु। यांकु सबसे जादा नुकसान सामाज तैं होलु, जैथें बणौंणा वास्ता एक ना बल कतगै पीढ़ि लगदन। यखम सोशल मीडिया न, यीं चुनौती तैं हौरि बडु़ बणै द्यायी। बिना जाणकारी, गलत जाणकारी पोस्ट करण से गलत बात कुछ हि मिनटु मा हजारू लोगु तक पौंछि जाणि छन। यांकु नतिजा च कि द्वि लोगु कु विवाद सांप्रदायकि महौल खराब करणु च। यामा सबसे खराब या बात च की लोग इंतजार बि नी करणा छा, अर अप्फि थोकदार बणिकि फैसला करणा।
हां जैन अपराध कायी वै फर कानूनी कारवै हूंण चैंद। दोषी तैं सखत सजा मिलण चैंद। दोषी के क्वीं बि धरम हूंयां। बौरागी वाला मा बि दोषी बि कुछ लोग छन। अर हम सर्या सर्या मुस्लिम समाज तैं दोष द्यूला, यु निसाब नीं च अर ना हि समाज वास्ता सै च। अगर हम हरेक विवाद तैं हिन्दू-मुसलमान का आंखौंन द्यखला त यांकु सबसे बडु नुकसान हमर प्रदेस तैं हि होलु, हमरि समाजिक एकता तैं होलु, जै फर हम गर्व करदो। उत्तराखण्डा मा हूंणि इन्न घटना सिफर कानून बन्दुबस्त कु सवाल नीं च, बल यु हमरा समाजिक विस्वास अर आपसी भै-भ्यात कु बि इमत्यान च।
बैरागी वाला मा कानून बन्दुबस्त फर बि सवाल छन किलैकि ये मामला मा या बात बि सै च की द्वियों का बीच पूरणु विवाद छायीं। या से पैलि बि शिकैत पुलिस से करे ग्यायी। पर यांकु यु मतबल त कतै नीं च कि कैकु कतल करे ज्यां। या घटना साफ रैबार देंणि च कि जब कानून की डैर खतम ह्वे जांद त इन्न परिणाम समणि औंदन। लेकिन पुलिस अर प्रशासन त सिरफ लैड़-झगड़ा तैं रोकि सकद, समाज मा पैदा हूयां अविस्वास तैं रोकणा वास्ता छ्वीं बत्थ, समाजिक मेल-मिलाप का वास्ता लोगुक कांधों पर बड़ी जिम्मेबरि च। दोषी तैं सखत से सखत सजा मिलण चैंद।
उत्तराखण्ड असल तागत च यखकि संस्कृति, भै-भ्यात की परंपरा। अब अगर हम सबि अपराध तैं धर्म कु ऐना लगिकि द्यखला त यांकु सबसे बडु नुकसान उत्तराखण्डै विरासत तैं हि होलु। आज दरकार दोषियों तैं बचौंणाकी नीं च, बल आज सबसे जादा दरकार च समाज तैं ब बंटण वलि सोच से बचौंणा की बि च। उत्तराखण्ड जन्नि शांत प्रदेस मा इन्नि हिंसा का वास्ता क्वीं जगा नीं च।
आज दरकार एक दुसरा तैं दोषी देंणा कु नीं च, बल आज दरकार च हमतैं अपणा बसम रैंणा की, विवेक अर जिम्मेदरि की च। तब हम अपणि औंण वलि पीढ़ि का वास्ता उत्तराखण्डै विरासत तैं सम्भलणा की, आज उत्तराखण्डा समणि अपणि पछ्याण बचौंणा सबसे बड़ी चुनौती च।
