महिला सशक्तिकरण कु सच
लोकतंत्र मा जनप्रतिधियों की जिन्दगि कतगै दा सार्वजनिक चर्चा कु विषय बणि जांद। खास कैकि तब जब यु मामला ब्यटुळों कु मान, सुरक्षा अर अधिकारी से जुड्यूं हो।
उत्तराखण्ड की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य अर वींका जवैं (पति) गिरधारी लाल साहू का बीच समणि अयां विवाद बि इन्नि सवाल खड़ा करणु च। यु मामलु सिरफ द्वी झणों का बीच कु अणबण नी रेग्ये, बल यु बिवाद ब्यटुल कु मान, झगड़ा, जाति सूचक अर जवाबदेही से बि जुड़िग्ये। रेखा आर्य न अपड़ा जवैं का खिलाप पुलिस मा सिकैत कायी अब आरोप लगैकि ब्यौ से पैलि ऊंका जवैं न अपणा पैलि ब्यौ की बात नी बतै छायीं। रेखा आर्य न बतै कि ऊंकु ब्यौ 6 जलै 2006 मा ह्वे, तब ऊतैं या जाणकारी नीं छायीं जैका दगड़ि ऊंकु ब्यौ हूंण च, वे मनखि कु पैलि बटि ब्यौ हूयूं च। उन्न बोलिकि बच्चों कु भवेष्य अर परिवारै चिंता देखिकि अबि तक वु चुप छायीं।
यांका बाद ऐ मामला मा सवाल बि खडु़ हूंद कि आखिर ब्यौ का इगता सालु बाद पैलु ब्यौ की जाणकारी बतौंणा की क्या खास बात च? अगर रेखा आर्य तैं या बात ब्यौं से पैलि पता नी छायीं, त धव्का देंणा कु मामला च। दूसरी तरफ इतगा सालु बाद या बात समणि आण फर बि सवाल खड़ा हूंणा छन। रेखा आर्य न अपड़ा जवैं पर ऊंका दगड़ि मारपिटै, धमकौंणा अर जातिसूचक ब्वना का आरोप लग्यां छन। अगर यु सबि आरोप सै साबित हूंदन त यु मामला सिरफ एक घार कु भितरा कु अणबण नी रै जांद, यु ब्यटुलों कु मान अधिकार कु बि सवाल च। कै तैं बि जाति का अधार फर कुछ गलत नी ब्वलें जै सकदु , या बात तब हौरि खास ह्वे जांद जब या बात प्रदेस सरकारै मंत्री खुणि ब्वलें जाणि च।
यीं घटना मा सबसे खास बात रेखा आर्य कु महिला सशक्तिकरण मंत्री हूंण च। जै मंत्रिक विभागै जिम्मेबरि ब्यटुलों तैं ऊंकु अधिकार का वास्ता चंट (जागरुक) करणु, ऊतैं अपणा खुट्टौ मा खड़ु करणा की, अन्याय का खिलाप लड़णा की हिकमत देंणा की च, वीं मंत्री न अपणा जवैं फर सतौंणा (उत्पीड़न) का अरोप लग्याँ छन। इन्न मा सवाल खड़ु हूंणू च कि अगर सत्ता अर राजनीतिक तागत रखण वलि ब्यटुळा तैं बि अपणु मान सम्मान अर सुरक्षा का वास्ता दुन्द (संघर्ष) करण प्वड़णु च, त प्रदेसा उ ब्यटुलों की दसा क्या होलि, जु न त आर्थिक स्वतंत्रता छन, अर न जौं की राजनीतिकी पकड़ च अर जु न त अपिणि बात कैतैं बतै सकदन? हाँ, या बात बि सै च कि कै ब्यटुला का दगड़ि अन्याय हूंणा मतबल यु कतै नीं च कि वु कमजोर च या फेरि सशक्तिकरण फेल ह्वेग्ये। अन्यो (अन्याय) का खिलाप अवाज उठौंणु बि सशक्तिकरण हि च।
बस ये मामला मा अब सबसे खास बात या च कि जांच कैका दबाव, पद अर राजनैतिक प्रभाव से नी हूंया, रेखा आर्य का मामला मा खळखळि (निष्पक्ष) जांच हूंण चैंद, रेखा आर्य का जवैं का लग्यां अरोपु की बि जांच हूंण चैंद अर सबि बात समणि आण चैंद।
यु मामला उत्तराखण्ड सरकार का वास्ता बि एक चुनौती च। किलैकि महिला सशक्तिकरण सिरफ एक योजना बणौंणा, लोगु तैं जागरूक करणा का वास्ता अभियान चलाणु कु अर मंच बिटि भाषण देंणा तक ही नीं च। यांकी सफलता तब मन्ने जालि, जब समाज का सबि ब्यटुला बिना डर्या, अपणि सिकैत पुलिस मा कै सक्यां, वींथै पुलिस अर प्रशासन की मदत मिल्यां अर निसाब मिल्यां। रेखा आर्य का मामला मा उठणा सवाल कु जबाब सिरफ राजनीकि बयान से नी मिललु। जबाब निष्पक्ष जांच अर कानूनी कारवै से हि मिललु। किलैकि महिला शक्तिकरण का सै मतबल कै ब्यटुला कु सिरफ मंत्री बणण हि नी च, बल इन्न व्यवस्था बणौंण बि च जैमा हरेक ब्यटुलों तैं मान, सुरक्षा अर निसाब मिल्यां।
अब दय्खण यों च कि यु मामला सिरफ राजनीतिक अरोप-प्रत्यारोप तक नीं रैंद या फेरि उत्तराखण्ड मा ब्यटुला तैं निसाब ऊंका अधिकार अर जबावदेही की दिसा मा एक मिसाल बि बणदु। किलैकि महिला सशक्तिकरण का दावों की असल इमत्यान भाषण मा ना, बल अन्यो का खिलाप कारैव अर पीड़ित तैं निसाब दिलौण मा हुंद।
