राम मंदिर मा चोरीः ‘आस्था पर चोट’

अयोध्या मा भगवान राम कु मंदिर बणण बाद जब राम मंदिर मा प्राण प्रतिष्ठा ह्वे, त सर्या देस राम का रंग मा रंगी ग्यायी। लोगु मा या उमेद जगी ग्यायी की अब देस मा राम राज्य ऐग्ये।

पर कैंथे क्य पता की राम राज्य की उमेद त बौत दूरै बात च, यखत ‘भगवान राम’ का मंदिर मा हि चोरी ह्वे जाली! या क्वीं छ्वटि घटना नी च बल या बौत बड़ी घटना च, किलैकि करोड़ों भक्तु की आस्था कु केन्द्र भगवान राम का मंदिर मा चोरी जन्नि अपराधिक घटना का बारम क्वीं स्वींणा मा बि नी सोचि सकदु। पर जब राम मंदिर मा सच मा चोरी की घटना ह्वे अर समणि ऐ, त बौत बड़ा सवाल खड़ा हूंणा छन। क्य यु हमर समाज कु नैतिक पतन नी च, त क्या च? क्य मनखि कु विवेक पूरि तरौं मोरिग्ये?

राम मंदिर मा चोरी की घटना तैं सिरफ सुरक्षा व्यवस्था मा कमी बोलिकि न बिसरे (भुला) जै कसदु? हां, या बात बि सै च कि या घटना सुरक्षा बदुबस्त मा कमी का कारण ह्वे सकदि, पर सवाल च या से बि बडु गैरु (गहरा) च।

हमरा मठ-मंदिर सिरफ ढुंगा-माटा का बण्यां नीं छन, वु करोड़ों लोगु की आस्था अर विस्वास कु प्रतीक छन। राम मंदिरा भितर ज्वा चोरी करे ग्यायी, वु ‘महापाप’ हि ना बल यु रामद्रोह च। बडु अपराध च, संवेदनशील च, किलैकि करोड़ो हिन्दुओं की आस्था तैं बि लुटि ग्यायी।

यांमा सबसे जादा चिंतै बात च कि जो लोगुन या लूट कायी, वु भगवान राम का सेवक का भेस मा छायीं, मंदिरै सेवा, देख-भाल की जिम्मेबरि ऊंका कांधों मा छायीं। अब अगर या बात सै साबित ह्वे जाली की भगवान राम का सेवाकर्मी अर विस्वासपात्रन यु काम कायी, त यु विस्वास दगड़ि सबसे बडु विस्वासघात होलु।

भारतीय संस्कृति मा मंदिरा की सेवा तैं भगवान की सेवा मन्यें जांद। सेवा कु मतबल समर्पण, निष्ठा अर पवेत्रता च। एक इन्नु पवेत्र जगा, जख लोग भगवान का दर्शन करणा वास्ता अपणि सर्या जिन्दगि की कमै लगै दिन्दन, वख वु मनखि जैंथे भगवान की सेवा की जिम्मेबरि दिईं च, वु अपणा हि फैदा का वास्ता चोरी करणु च। या चोरी सिरफ क्वीं चीज, क्वीं रुप्यौं की चोरी नी च, बल या चोरी करोड़ा लोगु की भावना अर विस्वास फर सीधा चोट च। राम मंदिर मा या चोरी की घटना सर्या मनख्यात तैं सरमसार करणि च।

आज हर कोई यु सवाल पूछणु च कि, “आखिर क्वीं कन्नु कैकि भगवान का घार मा चोरी कै सकदु? क्य वैंथे भगवान कु डैर नीं च?” यु सवाल हरेक वे मनखि का ज्यूं मा उठणु च, जैका भितर थ्वड़ा सी धार्मिकता अर नैतिकता बची च। आज कु बगत मा कुछ लोगु कु नैतिक स्तर इतगा गिरिग्ये कि ऊंका भितर न त कानून की डैर च अर ना हि भगवान की डैर। लोभ, लालच अर झट पैसा वलु मनखि बणणा की लालसा मा इंसान इन्नु काणू (अंधा) ह्वे द्यायी कि वु अब भगवान से बि नीं डरणु च। इतिहास गवाह च कि जै न बि धर्म अर आस्था कु नकुसान कायी, वैकु नास (पतन) जरूर ह्वे।

आज अपराधी भितर डैर खतम ह्वेग्यायी, या बात समाज का वास्ता बौत चिंता की च। धार्मिक जगों मा चोरी करण वलों कु जब तक समाज बिटि पूरि तरों भैर नी करे जालु, तब तक ऊंकी हिकमत कम नी होलि। भगवान राम न्याय, मरजादा, अर सत्य की प्रतीक छन। ऊंका धाम मा चोरी करणा की हिकमत करण वलों तैं, न त समाज तैं कबि माफ करण चैंद अर ना कानून तैं।

अबि यु बगत हमतैं गुस्सा दिखौंणा कु ना, बल हमतैं समाज मा नैतिक मूल्यों तैं दुबरा ज्यूंद करणा कु च, जै से क्वीं बि चोर हमरि आस्था का तरफा आंखा उठौंण कु हिकमत ना कै सक्यां। राम मंदिर मा चोरी सिरफ कानून कु विषय नी च, यु हम खुणि बि एक सीख च। यु हमर समाज तैं बि स्वचणा खुणि मजबूर करणि च कि हम अपणा धार्मिक अर नैतिक मूल्यों की रगक्षा कतगा गंभीरता अर ईमानदारी से करण छा।

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