गुर्जि कु मान, समाज कु उत्‍थान

उत्तराखण्ड की राजधानी देरादूणम राजकीय पॉलिटेक्निक पित्थुवाला बटि एक घटना समणि ऐ, यीं घटनन शिक्षा की दुन्या तैं हि ना बल सर्या समाज तैं झक कै द्यायी।

इमत्यान मा नकल करदा पकड़े ग्यायी एक एक छात्र, जैका बुबा काूनन व्यवस्था बणौंण वला विभागम नौकरि करदन, वैन पॉलिटेक्निक स्टाफ दगड़ि सिरफ इल्लै मारपिटै कायी की, तुमन म्यार ब्‍यटा तैं नकल करदा किलै पकड़ि।

या घटना सभ्य समाज वास्ता बौत सरमनाक च, या घटना एक प्रशासनिक चूक च, या घटना एक मनखि कु गुसा नीं च बल या घटना हमर समाजम बढ़दा जाणि नैतिक गिरावट अर वीआईपी संस्कृति कु बडु घंमड च।

इमत्यान शिक्षा व्यवस्थम ईमानदारी कु अधार हूंद। इमत्यान तैं खारु (निष्पक्षता) बणौंणा की जिम्‍मेबरि गुर्जि (गुरूजी) अर इमत्यान करौंण वला कर्मचारियों की हूंद। इमत्यान मा नकल रोकण ऊंकु काम च, जिम्‍मेबरि च। यांका का वास्ता ऊंतैं सबासी मिलण चैंद ना कि मार।

यीं घटना मा खास बात या च कि यीं घटनम ब्वे-बुबा बि जुड़या छन। ब्वे-बुबा अपणा बच्चों तैं पेरम करदन या बात सै च, पर पेरम मा अपड़ा नौंना की गलति फर बि वैंका दगड़ खडु हूंण बौत गलत च।

बच्चा न गलति कायी त, वैतैं यु बतौंणा कु काम, की क्य गलत च अर क्य सै च, यु काम ब्वे-बुबा कु हि च। हरेक बात फर बच्चों क् दगड़ि खडु हूंण बच्चाें कु भवेष्य खराब कै सकदु। यामा खास तब ह्वे जांद जब कानून व्यवस्था से जुड्या लोगुु फर हि काननू तैं अपड़ा हत्थम लिंणो कु आरोप लगदन।

अपणा नौंना की इमत्‍याा मा नकल करण की गलती अर वैथै बचौंणा का वस्ता वैका ब्वे-बुबा मास्टरु दगडि् मारपिटै करदन। पर यु इगता नी स्वचण छन कि यां से ऊंकु नौंना कु भवेष्य त कतै नीं बणलु पर हां वु अपण नौंना तैं गलत बाटा जरुर दिखौंणा छन।

सवाल त यु बि खड़ु हूंद कि यीं घटना मा गुर्जि गलत कख छन? क्य अपणि जिम्मेबरि निभौंणु अपराध च? शिक्षा कु संस्थान मा गुरुऔं का भितर डौर राली त गुर्जि की हिकमत त टुटि हि जाली। अगर गुर्जि इमत्यान मा नकल करण वलों तैं रोकणा की कोसिस नी कारला,अर हमरू सर्या शिक्षा कु बन्दुबस्त बि कमजोर ह्वे जालु। यीं घटना पर सखत कारवै नीं ह्वेलि त भवेष्यम क्वीं बि मास्टर इमत्यान मा नकल करण वला पढ़दरौं तैं नकल करण से रोकणा की हिकमत नीं कै साकला। तब स्वाचा समाज तैं कना इंजीनियर अर डागटर मिलला।

समाज कानून व्यवस्थम नौकरि करण वला लोगु से उमेद करदु की, इन्न पदु पर बैठ्या लोग नियम अर अनुशासन कु आदर्श हूंदन। या घटना सिरफ एक संस्थान की नीं च। या सर्या समाज खूणि एक रैबार च की शिक्षा, अनुशासन कानून कु सम्मान मा क्वीं समझौता नीं करे जै सकदु।

यांका दगड़ि ब्वे-बुबा तैं बि स्वचण प्वाड़लु की हम अपणा नौन्याळु तैं क्य संस्कार दिंणा छौ। सफलता सिरफ झट अर गलत काम से ना बल बल मेनत से मिलदि।

मास्टरु पर हत्थ उठौंणु हमरि संस्कृति अर भवेष्य पर सीधा हमला च। गुर्जि कु मान अर सुरक्षा करणु उतगै जरुरी च जतगा कि पढ़दरौं क् अधिकारु की रक्षा करणु। अच्छु समाज वीं च जख गुर्जि बिना डैर का अपणि जिम्मेबरि तैं निभै सक्यां अर ब्वे-बुबा अपणा बच्चों तैं सै शिक्षा दियां। गुरु कु मान, कानून कु पालन अर नैतिक जिम्मेबरि निभै की एक कटकुटु अर सभ्य समाजै बण्ये जै सकदु।

पॉलिटेक्निक की या घटना एक चेतावनी च की आज हम गुरु दगड़ि नीं खड़ा होला, त आण वलि पीढ़ि खुकलि (खोखली) अर उदंडि हि होली। किलैकि जख बच्चौं की गलती फर वैंथै बचौणु अर अनुशासन बणौंण वला तैं हि दोष बतै जांद, त पढ़दरों क ज्यूं मा नियम कानून कु मान कम ह्वे जांदा। ऊतैं इन्नु लगदु कि तागत पर अर दबौ से हरेक गलती तैं लुकै जै सकदु।

इल्लै आज गुरु कु मान अर अधिकार बचौंणु बौत जरुरी च। किलैकि अगर शिक्षा व्यवस्था कु अधार कमजोर प्वोड़ि जालु, वख एक दिन सर्या शिक्षा बन्दुबसत लूलु (लगड़ा) ह्वे जालु।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *