शैक्षिणक संस्थान कु मान (गरिमा) हि ना बल देवभूमि की संस्कृति पर बि चोट
देरादूणै शैक्षणिक संस्थान डीएवी कॉलेज मा उर्यूं छात्र समारोन उत्तराखण्डा सांस्कृतिक पछ्याण अर शैक्षणिक मंचा की गरिमा पर सवाल खड़ा कै दींन। छात्र समारोह मा हरयाण कु एक गायक जैकु नौं मासूम शर्मा छायीं, वैंन मंच फर ज्व भाषा बोलि वा भाषा बौत नखरि छायीं, वैंन मंच बटि नखरि-नखरि गाळी दींन। वैंन हमरि शैक्षिणक संस्थान कु मान (गरिमा) तैं नुकसान हि नी पौंछायीं, बल देवभूमि की संस्कृति कु मान तैं बि नुकसान पौंछाण कु काम कायी।
उत्तराखण्ड तैं देवभूमि ब्वलें जांदा- या सिरप एक क्षेत्रा की पछ्याण हि ना बल यां एक सभ्यता, आन अर सांस्कृतिक मूल्यों कु प्रतीक च। इन्न मा महाविद्यालय जख पढ़दरा ज्ञान, संस्कार अर जिन्दगि बढ़ौंणा वास्ता औंदन, वख इन्न भाषा ब्वलण बौत नखरू हि नीं च बल या बौत चिंतै बात बि च।
मंच सिरप मौज-मजा कु साधन हि नी हूंदा, मंच समाज तैं शिक्षा अर नै दिसा देंणा कु बि काम करदु। पर जब मंच बिटि हि गाळी दिये जाली अर जै थैं हमरा जनप्रतिनिधि हौरि अगनै बढ़ौंणा कु काम कारला, त स्वाचा वख पढ़ै करणा वास्ता अयां छात्रु पर यांकु क्य असर होलु?
“हम जहां खड़े, सरकार से बड़े”, आखिर यांकु मतलब क्य च? इन्न बयान लोकतांत्रिक मूल्य अर कानुन बन्दुबस्त कु ठट्टा लगौंणु नी त क्या च? क्य द्विया कानुन अर उत्तराखण्डा रैवासियों तैं गुंठा दिखौंणा छन।
उन्न त उमेश कुमारन शर्मा अर मासूम शर्मा द्वियों न सोशल मीडिया म माफी मांगी याली। पर यांका बाद बि सवाल त अबि बि ज्यूंद च कि वि़द्या कु मंदिरम गाळी देंण वला यीं द्विया माफी लैक छन?
उमेश शर्मा सोशल मीडिया मा माफी मांगिकि ब्वना छन कि मिन मासूम तैं रवकणा कोसिस कायी, पर वैन मेरि बात नीं मानि। इतगै हि ना उमेश ब्वना छन कि अज्काल त गाली देंणा क्वीं बड़ी बात नीं च, अज्काल त पिग्चर मा बि खुब गाली दियें जाणि छन। या क्वीं बड़ी बात नी च। हाँ उमेश कुमार सै ब्वना छन की गाळी दिंणी क्वीं बड़ी बात नी च, किलैकि या उमेश कुमारै संस्कृति च।
देवभूमि की संस्कृति त अपणि पवेत्रता, सरलता अर अपण्यांस का वास्ता पछ्यणे जांद। यखकि बोलि मा मिठास अर प्रेरम दिख्येंदु, यख दीदी भुली जन्न बोल सिरप बोल हि नी छन, यीं रिस्ता कु मिठास तैं बतौंद।
त दुसर तरफां मासूम ब्वनु च की मि मानसिक दबौ मा छायीं। बदमाश म्यारु पिछनै प्वड़यां छायीं। मासूम दबौ मा छायीं त वैतैं सबसे पैलि अपण दबौ कम करण वास्ता पुलिस तैं बतौंण चैंद छायीं की कुछ लफंडर म्यार पिछनै प्वड़यां छन। मंच फर मासूम की ब्वलि भाषा साफ बतौंद की यु सिरफ मानिसक दबौ कु नतीजा त कतै नी च।
हां उतगा जरूर ह्वे की उमेश कुमार भाषा सुणिकि की (हम जहां खड़े, सरकार से बड़े) वैंकी हिकमत हौरि बढ़िग्ये अर वैंन इतगा तक नी सोचि कि मि कख अयूं छौं।
सवाल यौं च कि क्य हम अपड़ा शैक्षणिक संस्थानु तैं इन्न गाळीबाज अर अपसंस्कृत कु हिस्सा बणण द्युला?
सवाल उत्तराखण्डै वु ज्वानु फर जु वखम छायीं, इन्न गाळी देंण वलु तैं उबरि हि सबक किलै नीं सिखै?
सवाल त यौं बि च कि क्य हमर प्रदेसम अच्छा कलाकार नी छन, जु हमतैं हरयाणा, बिहार (अबि कुछ दिन पैलि ऋषिकेश मा) बटि कलाकार बुलौंण प्वड़णा छन?
अब भवेष्य मा इन्नु नीं हूयां या का वास्ता साफ निर्देश हूंण चैंदन अर मंच की गरिमा बणि रैंण चैंद। समाज क सबि कलाकार, नेता की अर कार्यक्रम उर्यौंण वलों की जिम्मेबरि हूंण चैंद। ऊंकु अपणु ब्यौवार से पढ़दरौं का बीच एक अच्छु रैबार जाण चैंद।
अभिव्यक्ति की आजादी अर मतबल यु कतै नीं च की कैकु मान अर शालीनता की केर (सीमा) त्वडे़ ज्यां।
या घटना सिरप एक घटना नीं च, बल हम खुणि एक चेतावनी बि च कि अगर हम अपणा सांस्कृतिक धरोहर अर पछ्याण तैं बचाणै कोसिस नी करला त देवभूमि की पछ्याण सिरप पोथी कु पन्ना मा हि रै जाली।
