बदरीनाथ धाम : आस्था अर परंपरा कु सवाल

बदरीनाथ धामा का पाट खुलण से पैलि वख उर्यूं एक सांस्कृतिक कार्यक्रम पर सवाल उठौंणु सिरफ एक आयोजन की आलोचना नी च, बल या आस्था, परंपरा अर अज्कालै सांस्कृतिक अजादी कु बीच तालमेल कु सवाल बि च।

हिन्दू धर्म का वास्ता बदरीनाथ धाम बौत खास महत्व च। मान्यता च कि ज्यार्तिमठ बदरीनाथ धाम मा छै मैना मनखि अर छै मैना द्यब्ता भगवान बदरी विशालै पूजा करदन। यीं मान्यता का कारण हि या जगा सिफर धार्मिक जगा नी च, बल बदरीनाथ धाम से करोड़ो लोगुकि आस्था बि जुड़ी च।

इन्न मा जब ह्यूंदा छै मैना बदरीनाथ कपाट बंद रैंदन त वख भगवान नारायणै की पूजा कु अधिकार सिरफ द्यब्तौं तैं च। इन्नम बदरीधाम मा क्वीं बि सांस्कृतिक कार्यक्रम उर्ये जांद त सवाल खड़ा होला हि। किलैकि धार्मिक जगो फर धार्मिक परंपरा तोड़िकि, अगर इन्न सांस्कृतिक आयोजन होला त लोगुकि धार्मिक अर अध्यात्मिक भावना पर बड़ी चोट लगद।

‘जय बदरी विशाल’ कु जय घोष यु बतौंद की गढ़वाल रैफल की भगवान बदरी विशाल फर कतगा आस्था च। गढ़वाल रैफल सिरफ अपणा शौर्य वास्ता हि नी पछ्यणें जांद बल गढ़वाल रैफल धार्मिक अर सांस्कृति विरासत से बि जुड़ि च।

इन्न मा कपाट खुलण से पैलि बदरीनाथ धाम मा गढ़वाल रैफल कु उर्यू ऐ आयोजन फर सवाल खड़ु हूंदन कि क्य सबि यीं बात से अंणजाण छायीं की बदरीनाथ धाम मा कपाट खुलण से पैलि ह्यूंदा छै मैना द्यब्ता भगवान बदरी विशालै पूजा करदन? या ऊतैं परंपराऔं बारम जाणकारी नी छायीं?

‘बदरीनाथ धाम मा सेना कु उर्यूं ये आयोजन कु विरोध तीर्थ पुरोहितों अर हकहकूक धारियों न बि कायी। ऊंकु बि बोलणु यीं छायीं कि भगवान बदरी विशाल का कपाट खुलण पर गाजा-बाजा अर वैदिक मंत्रों से उत्सव मण्यें जांद, पर कपाट खुलण से पैलि क्वी बि मानवीय सांस्कृतिक कार्यक्रम हमरि पुरणों बिटि चलणि मान्यता अर मरजादा का खिलाप च।

अगर इन्न आयोजन उर्यौंणा की दरकार छायीं, त यांका वास्ता पैलि सै बगत, सै जगा, अर मंदिरा आस्था, धार्मिक मान्यता अर लोगुकि भावना कु बि ध्यान रखण चैंद छायीं।

अब बडु सवाल यौं च कि क्य बदरीनाथ धाम इन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम उर्यौंण सै च? बदरीनाथ धाम क्वीं पर्यटन की जगा नीं च बल बदरीनाथ धाम करोड़ो लोगु की आस्था अर विस्वास जगा च। यखकि परंपरा क्वीं धार्मिक नियम हि नी छन, बल यी लोगुकि भावना से बि जुड़ि छन।

इल्लै यख हूंण वला इन्न आयोजन से पैल परंपरा अर लोगुकि भावना कु बि सम्मान रखे जाण चैंद। बदरीनाथ धाम जन्नि पवेत्र जगा पर क्वी बि फैसला सिरफ प्रशासनिक न बल सांस्कृतिक अर आध्यात्मिक जिम्मेबरि बि हूंण चैंद।

कखि न कखि प्रशासन अर संस्थाओं तैं यु बि समझण प्वाड़लु की बदरीनाथ धाम सिरफ क्वीं घुमघाम करणा की जगा नी च, बल यु एक ज्यूँदि आध्यात्मिक धरोहर च। विकास अर आयोजन जरुरी छन, पर पैलि यख की परंपरा अर पुरोहितों की राय लिणी बि बौत जरूरी च, जै से कैकि बि आस्था पर चोट न लग्यां।

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