आस्थाक् नौं फर सड़कियों मा घपरोल आखिर कब तक?

सौंण कु मैना, सर्या देस राजमार्ग अर सड़कियों मा ‘हर हर महादेव’ का जयकारा लगणा छन। कांवड जातरा सनातन मा श्रद्धा, कठिण साधना अर संकल्प च। लाखों श्रद्धालु नंगा खुट्टा किलोमीटर पैदल चलिकैकि गंगाजल ल्यदन अर भगवान शिव कु जलाभिषेक कदरन। पर कुछ सालु बिटि यीं पवेत्र धार्मिक जातरा की ज्‍वा तसबीर समणि आणि च, वान लोगु की जिकुड़ि भितर डैर पैदा कै द्यायी।

सरकार हर साल कावड़ जातरा मा बड़ा-बड़ा दावा करद। हेलीकॉप्टर बिटि कावड़ जातरियों फर फुलु की बरखा करे जांद, पुलिस का अधिकारी अर कखि त नेता कांवड़ियौं का खुट्टा धूंणा अर मलसणा रैंदन। कावड़ियों की इतगा खातिरदारी करणा बाद बि कुछ कांवड़ जातरी कानून व्यवस्था दगड़ि खिलवाड़ करण रैंदन। सड़क गैव दिंणि च, कुछ कांवड़ियों कु व्यौहार देखिकि इन्नु लगणु च की कानून यु खुणि कुछ नीं च। एक मोटरसैकिल म तीन-तीन लोग बिना हेलमेट का। क्‍या यु का वास्ता क्वीं ट्रैफिक नियम नीं छन? डीजे कु हल्ला अर कांवड़ियों कु घररौळा बाद बि पुलिस प्रशासन का आंखा बुझयां रदन।

यां से जादा चिंतै बात या त च की कांवडि जरा-जरा सी बात फर लड़ै झगड़ा बि करदन। अबि हरद्वार मा पुलिसम समणि एक कार तैं कावड़ियौं तोड़ दे। त या से बि जादा बड़ी घटना लखनऊ मा ह्वे जख एक छ्वट्टा-छ्वट्टा बच्चों की इस्‍कुला गाड़ी फर कावड़ियों न लाठा-डंडौं न हमला कैकि सर्या गाड़ी तोड़ि द्यायी। त मेरठ मा एक पुलिस वला तैं भगै-भगै कि मारी।

यख सबसे बड़ु सवाल हि यौं च कि आखिर युकीं इतगा हिकमत कनि कैकि बढ़ि अर पुलिस युंका अगनै कारवै करण से चुप किलै ह्वे जांद। कावड़ ल्याणा कु मतलब यु कतै नीं च कि कानून अपणु हत्थ मा लिंणु कु यु तैं लैसेंस मिलिग्ये?

हरेक साल कावड़ जातरा मा यु सवाल उठदु कि आखिर प्रशासन यु फर कारवै करण से किलै डरदु? क्य राजनीतिक दबाव या फेरि बोट की चिंता कानून तैं कमजोर करणि च?

जु हत्थ गंगाजल उठौंदन, वीं हत्थ ढूंगा उठौंन्दन, त या शिवभक्ति ना, बल आस्था कु नौं फर अराजकता च। किलैकि सच्चु शिव भक्त कबि बि तोड़फोड़, लडै़ झगड़ा कतै नीं कै सकदु। शिव त ‘करूणा’, ‘कल्याण’ का प्रतीक छन। जु शिवभक्त सड़कि मा तोड़फोड़ करणा छन, वु शिव भक्त त कतै नीं ह्वे सकदन।

धार्मिक आस्था कु सम्मान हूंण चैंद अर शिव भक्तु तैं सुविधा मिलण चैंद पर कानून तोड़िकि त कतै ना। अगर कावड़िया पुलिस दगड़ि मारपिटै करदन, कैकि गाड़ी मा तोड़फोड़ करदन, इस्कुल का गाड़ी तैं त्वड़दन त यांका खिलाप कड़ी कारवै हूंण चैंद, जन कै अपराधी खिलाप हूंद।

सरकार तैं यीं जातरा की गरिमा दगड़ि लोगु का सुरक्षा की बि चिंता हूंण चैंद। जब क्वीं कावड़ियां लडै़ झगड़ा, तोड़फोड़ या फेरि कानून तैं अपणा हत्थ मा लिंद त इन्‍ना कावड़ियों फर कारवै हूंण चैंद अर सर्या नुकसान की यु से हि बसूल हूंण चैंद।

आखिर आस्था का नौं फर सड़कियों मा इन्नु घपरोळ कब तक? अब बग्ग ऐगे की ‘शिव भक्त’ अर ‘घपरोळ’ करण वलों का बीच फरक करे जाण चैंद। किलैकि जु ‘शिव भक्त छन वु घपरोळ नी कै सकदा, अर जु घपरोळ करदन वु ‘शिव भक्त’ कतै नीं ह्वे सकदा।

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