‘देवभूमि: भै-भ्यात बचौंणा की चुनौती’

कर्णप्रयाग मा सिख निहंग अर कर्णप्रयागा रैवासियों का बीच हूंयी छेड़ि स्वचणा खुणि मजबूर करणि च कि आखिर एक छ्वटि-म्वटि घटना मा लाठा, ढुंगा हि ना बल तलवार बि चलणि छन। या स्थिति चिंता वलि हि ना बल समाज का वास्ता बौत बड़ु खतरा की सानी करणु च।

उत्तराखण्डै पछ्याण सदनि बिटि शांति, धार्मिक सहिष्णुता अर भै-भ्यातै रायीं। पर कुछ बग्त बिटि उत्तराखण्ड मा हूंणि घटना उत्तराखण्डै तैं झकोळणि छन। अबि कुछ दिन पैलि ऋषिकेश मा हरयाणा का सैलाणि दगड़ि ज्वा मारपिटै की घटना तैं, कुछ लोगुन उत्तराखण्ड अर हरयाणा की लडै़ बणि दे। कर्णप्रयागै घटना बाद, नगरासू गुरुद्वारा मा निंहग सिखों कु कब्जा का बाद हूंयू विवाद बौत सर्या सवाल खड़ा करणु च।

सबसे बडु सवाल त यौ च कि अगर धार्मिक जगा मा कब्जा ह्वे, त वैकी जांच हूंण चैंद। अर जु बि यांका दोषी छन, उ फर कानून कारवै हूंण चैंद, अर सच सब्यौं का समणि औंण चैंद। लोकतंत्र मा भावना ना बल सबूत अर कानून का अधार फर फैसला हूंण चैंद न की धार्मिक भावना का अधार फर।

सवाल च यु बि च कि उत्तराखण्ड पुसिलन गुरुद्वारा मा कब्जा कैबि बैठ्यां निहंगु तैं सुरक्षित भैर निकालि की, किलै जाणि द्यायी? यांका बारम लोग तरौं-तरौं की छ्वीं लगौंणा छन। पर यखम हमतैं या बात बि समझणि प्वाड़लि की पुलिसा की पैलि जिम्मेदारी लोगु की जान-मान की रक्षा करणु, लड़ै-झगड़ा तैं रोकणु अर कानून-बन्दुबस्त तैं बणौंणा की बि च। ह्वे सकदु निहंगु तैं सुरक्षित छोड़णु पुलिस की रणनीति कु हिस्सा रै होलु। पर यांका बाद निंहगु फर कारवै बि बौत जरूरी च। गुरुद्वारा मा कब्जा कैकि बैठ्या निंहगु तैं गुरुद्वारा बटि सुरक्षित भैर निकालिका भेजणु कु मतबल यु कतै नीं च कि यु निहंग दोषी नीं छन; ये जुरमा वास्ता वु तैं कतै माफ नीं करे जै सकदु। हां, यां से वु जरुर ह्वे कि ऊंकी हिकमत हौरि बढ़िग्ये। अर यांका बाद, वु निहंगु न सोशल मीडिया मा उत्तराखण्ड तैं सीधा चुनौती द्यायी अर जु बोलि, यान विवाद हौरि बढ़िग्ये।

सबसे बड़ा सवाल यौं च कि इन्न विवादु से नुकसान कैकु हूंण च? या से सबसे पैलु नुकसान सामाजिक विस्वास कु हूंणू च। सालु बणि बण्यूं भै-भ्यात कुछ घंटों मा खतम ह्वे जाणि च। दुसरू नुकसान प्रदेसा अन्वार कु हूंणू च। उत्तराखण्ड अर पंजाब, उत्तराखण्ड अर हरयाणा का बीच छेड़ि सिरफ कुछ श्रद्धालुऔं कु बीच विवाद छायीं, जु असानी से हल करे जै सकदु छायीं। यखम बडु सवाल हि यो च कि जब हम हरेक छ्वटि-म्वटि घटना तैं बडु विवाद बणैं कि धर्म अर क्षेत्रवाद का ऐना से द्यखला, त सबसे बडु नुकसान त हमर समाजै भै-भ्यात कु हि होलु।

उत्तराखड देवभूमि च अर यीं भूमि मा कन्नु बि सांप्रदायिक अर क्षेत्रीय विवाद कतै नीं हूंण चैंद। यख औंणु वलि हरेक मनखि कु स्वागत च, पर हां, वे मनखि तैं प्रदेस कु कानून, अर यखक लोगु की परम्परा अर सामाजिक मरजादा कु बि ख्याल रख प्वाड़लु। अर हाँ, वैथे कानून अपणा हत्थ म लिंण से बचण चैंद।

आज सवाल कै पक्ष की हार या जीत कु ना बल, बस जीत सच की हूंण चैंद। अर से मामला मा सै जांच हूंण चैंद, जै से यु साफ ह्वे सक्यां की, सच मा ह्वे क्य छायीं अर कु गलति छायीं? किलैकि देवभूमि की पछ्याण तलवारों, लाठा अर लड़ै-झंगड़ा से ना, बल शांति, न्याय अर सामाजिक भै-भ्यात से बणि च। उत्तराखण्डै यीं पछ्याण थैं बणै की रखणु सरकार, प्रशासन, संगठनों अर प्रदेसा सबि रैवासियों की जिम्मेदारी च।

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