ऐसान ना, बल पर्यटन त . . . . .
उत्तराखण्ड मा ‘चारधाम जातर’ सरासर चलणि च पर यांका बीच मा सोशल मीडिया लड़ै-झगड़ै की आणि खबर अर यांका बाद सुरु हूयां ‘राज्य बनाम राज्य’ कु विवाद हमरि समाजै परिपक्वता पर बौत बड़ा सवाल खड़ा करणु च।
ऋषिकेशम हरयाणा कु सैलाणि अपणि गाड़ीक् भितर बटि सड़किमा जाणि एक ब्यटुला तैं गलत-गलत सानी करिन। जैका बाद ऋषिकेश लोगुन वु तैं पकड़ि याली अर खुब मारि, ऊंका गाड़ी का काँच फोड़ि दींन, यांकु वीडिया सोशल मीडिया मा खुब वायरल हूंण च।
ऋषिकेशम हरयाणा कु सैलाणि दगड़ हूयीं मार-पिटै की यी घटना का बाद हरयाण कु एक यूट्यूबर उत्तराखण्ड का लोगु तैं चितौंणु च। यूट्यूबर हर्ष छिकारा कु ब्वनु च कि हरद्वार अर ऋषिकेशा होटल हरयाणा का लोगु का दम फर चलणा छन। उन्न हरयाणा का लोगु से विनति कायी कि वु एक साल तक हरद्वार अर ऋषिकेश नीं ज्यां। इन्नु करण से उत्तराखण्डा लोगु तैं अकल ऐ जाली।
यीं द्विया इन्नि बात छन जैकि जतदा बि तू-तू (निंदा) करे ज्या बौत कम च। किलैकि इन्न बयान लोगु तैं भड़काणू का काम करदन, या सि समाज मा सिरफ नफरत कु परचार हूंद, ना की समस्या कु क्वीं समाधान।
यीं घटना क बाद एक नै बैस सुरु ह्वेग्ये एक तरफा ब्यटुलौं की सुरक्षा कु सवाल च, त दिसर तरफां वा भीड़ ज्वा कानून अपणा हत्थ मा लिंण च अर सड़किमा हि फैसला करणि च। ऋषिकेशा या घटना सबसे बड़ी गलती या च कि भीड़ अप्फु तैं जज अर पुलिस समझणि च अर कानून तैं अपड़ा हत्थ मा लींणि च।
कैबि सभ्य समाज मा कैथै बि नंगी कैकि पिटणा की मंजूरि कतै नी दिए जै सकदि।
या घटना जै ब्यटुला क् कारण ह्वे वा अब सोशल मीडिया मा ब्वनि च की इन्नु कुछ नी ह्वे, मिन लोगु तैं समझौंणा की कोसिस कायी पर लोग नी माना। साफ बतौंणु च की लोगुकि भीड़न बिना स्वच्यां अर सिरफ अफवा फर कैकि दगडि मारपिटै कायी।
त दूसर तरफा हरयाणा कु यू ट्यूबर न सर्या उत्तराखण्ड तैं या खबरदार कायी अर बोलिकि उत्तरखण्डा लोगु सैलाणियों से हि अपडु पुटगा भ्वरणा छन। बतौंणु च कि वु पर्यटन से हि ना बल उत्तराखण्ड से बि अणजांण छन।
पर्यटन कु मतबल कैकि ऐसान नीं च, बल पर्यटन त द्विया तरफा की आर्थिक अर सांस्कृतिक नातेदारि च। उत्तराखण्ड सैंणा क्षेत्र बटि औंण वला जातरियों तैं अध्यात्मक अर इन्नु ऐसास दिंद जन्न की वु प्रकृति की खुचळि मा अयां छन, त सैलाणि यखकि आजीविका मा मदत करदन। यु एक दुसरा कु सारू छन, या क्वीं दादागिरी नी च।
यांका दगड़ि यु सैलाणियों तैं या बात समझण प्वाड़लि कि या देवभूमि च, जख गंगा जी का छाल बैठिकि शराब पिणु यखकि संस्कृति अर धार्मिक मरजादा का खिलाप च। पर्यटकु तैं स्वच्ण चैंद कि वु धुमणा का वास्ता अयां छन, वु यखक सै-गुसै (मालिक) नीं छन।
त दूसर तरफा देवभूमि का लोगु तैं बि समझण प्वाड़लु कि कैकि पिटै कैकि वु अपणि हि ‘अतिथि देवो भव’ की संस्कृति कु नुकसान करणा छन। क्वीं उत्तराखण्ड ऐकी कुछ गलत करणु च त वांका वास्ता पुलिस च। काूनन व्यवस्था बणौंणा की जिम्मेबरि हम सब्यों की च पर यांकु यु मतबल काूनन तैं हत्थ मा लिंणु कतै नीं च।
सोशल मीडिया मा वीडियो बणै कि वायरल करणु कि मिथै कगता लैक मिलला, यु सब यांकु नतीजा च कि आज द्वी प्रदेसु की भै-भ्यात मा विस रळै जाणु च।
अब बगत ऐग्ये कि सरकार अर मित्र पुलिस तैं काूनन अपणा हत्थ मा लिंण वला लोगु अर गलत करण वला सैलाणियों पर सखत करवै करण चैंद, जै से भवेष्य मा इन्नि घटना दुबरा कतै नी हूयां अर देवभूमि अर मेमान (सैलाणि) द्वियों कु मान बच्यूं रैयां।
