कुर्सी की ळाळसा . . .
उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन मा सबसे अगनै रैण वळि पार्टी उत्तराखण्ड क्रांतिदल (यूकेडी) का भितर गुटबाजी की लड़ै एकदा दुबरा समणि ऐग्ये।
क्षेत्रीय दल यूकेडी का भितर जब-जब गुटबाजी ह्वे तब नुकसान सिरफ एक राजनीतिक दल कु ना, बल यु सर्या प्रदेस स्वाभिमान अर मुद्दों कु भि हूंद।
पिछल कुछ साल बटि प्रदेस कु यकुलु क्षेत्रीय दल उत्तराखण्ड अपडु बजूद खोजणु छायीं। कुछ ज्वान यूकेडी तैं खड़ु करणा वास्ता कोसिस करणा छायीं। पर जन्न-जन्न चुनौ नजीक आण लगिन, युकीं कुर्सी की ळालसा कु लारू गुच्चु बटि पटकण बैठिग्ये। कुर्सी कु पिरेम यूकेडी का वास्ता सदनि खराब हि रायी। अर अबि बि यु मामला सिरफ कुर्सी फर धाक जमौंणा कु च।
9 नवम्बर 2000 मा उत्तराखण्ड बणणा बाद, जब यूकेडी तैं प्रदेसम एक मजबूत पार्टी बणणु छायीं, वु दल सत्ता का लालच अर गुटबाजी की झंगज्याट बटि अबि तक भैर नी निकलि साकी।
साल 1979 मा डॉ. देवी दत्त पंत, इंद्रमणि बडोनी, विपिन चंद्र त्रिपाठी अर काशी सिंह ऐरी जना नेतौं न यूकेडी तैं पाड़ कु मान अर विकास कु स्वींणा देखिकि सैंती-पाली छायीं, वा पार्टी बार-बार नेतौं की ळाळसा का कारण अपणु मान तैं ज्यूंद रखण की लडै लड़णि च।
साल 2002 मा उत्तराखण्ड प्रदेसा पैलि चुनौ मा यूकेडी न 62 सीटु फर अपणा उमेदवार खड़ा करनि। ऐ चुनौ मा यूकेडी तैं चार सीट मिलिन। यूकेडी कुल जमा 6.36 प्रतिशत वोट मिलि। चुनौ आयोगन यूकेडी तैं राज्य स्तरीय राजनीतिक दल कु दरजा की मान्यता दे द्यायी।
2002 मा 4 सीट जितण वलि यूकेडी न 2007 मा तीन सीट जीतिन।
यांका बाद सत्ता का ळाळच मा पार्टी न तिड्वाळ ऐग्ये। दिवाकर भट्ट कु भाजपा सरकार मा सामिल हूंणू अर वांका बाद राजनीतिक खिचाताणिं पार्टी का भितर घपरोळ मच्येें दे।
साल 2012मा पार्टी कु कमान अर निसाण तैं लेकैकि पार्टी का द्वी फाड़ ह्वे ग्यींन।
यूकेडी (पंवार) अर यूकेडी (दिवाकर)। यूकेडी पंवार अर यूकेडी दिवाकर का बीच इतगा खिंचाताणि ह्वेकि निर्वाचन आयोग तैं पार्टी कु निसाण ‘कुसी’ फ्रीज करण पोड़िग्ये।
2012 यूकेडी न 41 सीटु मा चुनौ लड़ि अर सिरफ एक सीट जीति। अर प्रीतम सिंह पंवार कु कांगेस सरकार मा मंत्री बणण का बाद अर बाद का समर्थन वापिस लिंण से पार्टी तैं धक्का लगि। यांकु नतीजा यु ह्वेकि 2017 अर 2022 चुनौ मा पार्टी फर लोगु कु भरोसु 1 प्रतिशत से भी कम ह्वेग्ये अर यूकेडी एक सीट बि नी जीति साकी।
क्षेत्रीय दल यूकेडी कु कमजोर हूंण से प्रदेसम भाजपा अर कांग्रेस कु एक तरफा राज ह्वेग्ये।
जु मुद्दा प्रदेसा जनता का अर क्षेत्रीय छायीं वु भाजपा अर कांग्रेसा जना राष्ट्रीय दलों की केंन्द्रीय नीति मा दबी ग्यींन।
गैरसैंण राजधानी प्रदेस कु सबसे बडु स्वींणु छायीं जु आज तक पूरू नीं ह्वे। भू-कानून, मूल निवास 1950, जल, जंगल, जमीन जना सबि मुद्दा कमजोर ह्वेग्यींन। पाड़ मा पलायन रोकणा वास्ता क्वीं खास नीति नी बणि। आज जब ज्वानु, बेरुजगार आंदोलन करदन तब ऊतैं एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल की कमी दिख्येंद, ज्वा ऊंकी अवाज तैं विधानसभा मा उठै सक्यां।
अब बगत ऐग्ये कि यूकेडी का नेतौं तैं या बात समझण चैंद की पार्टी की हरेक फूट भाजपा अर कांग्रेसा वास्ता सत्ता का बाटा मा अयां कांडौं तैं साफ करद अर उत्तराखण्डियों का अधिकार तैं कमजोर करद।
यूकेडी तैं याद रखण प्वाडलु की क्षेत्रीय दल एक भौगोलिक क्षेत्र, अपणि बोलि-भाषा, सांस्कृतिक पछ्याण अर अधारित दल हूंदन। क्षेत्रीय दल से लोगु की उमेद राष्ट्रीय दल से जादा हूंद।
अब यूकेडी तैं अपणि पछ्याण अर मान बचौंण, त पार्टी का नेतौं तैं कुर्सी की ळाळसा छोड़िकि पार्टी की जिम्मेबरि ज्वानु का कांधों फर धैरिक एक मंच फर आण प्वाड़लु। नथर भोळ इतिहास गवै द्यालु कि जै दलन उत्तराखण्ड बणै, वु अपणा ही नेतौं की अदूरदर्शिता की बलि चढ़िग्ये।
