भगवान मा भेद किलै?
धर्म कु उद्देश्य मनखि तैं जोड़णा कु, सद्भाव अर समरसता कु रैबार देंणा कु हूंद। धर्म हमतैं मरजादा (मर्यादा), एक दुसरा कु धर्म कु सम्मान करणु सिखांद। पर यांका बाद अगर धर्म का मंच बटिन भगवान का रूप, नाैं अर जलम स्थान की तुलण ह्वेली अर एक भगवान तैं दूसर से बडु (श्रेष्ठ) बतौंणा कोसिस होलि, तब सवाल खड़ा त होला हि अर सवाल उठौंणा सै बि छन कि आखिर हम कन्नि धार्मिक संस्कृति तैं अगनै बढ़ौंणा छा?
मध्य प्रदेस मा उप्फु तैं बागेश्वर धाम का कथावाचक बतौंण वला धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री कु भगवान राम अर श्रीकृष्ण तैं लेकैकि दियां बयान फर सवाल खड़ा हूंणा छन। मध्य प्रदेसम एक कथा मा उन्न बोलिकि हमरा भगवान त सीधा छन, ऊंकु नौं बि सीधु, ऊंकु धाम अयोध्या है, अर तुमरा भगवान ट्याढा, ऊंकु नौ बि ट्याढु अर धाम बि ट्याढु वृंदावन च। उन्न त यख तक बोलि कि बंसुरी बजौंणु त खेल च, पर धनुष चलौंणु क्वीं खेल नीं च। इतगै ना उन्न भगवान श्रीकृष्ण का त्रिभंगी स्वरूप अर बंसुरी बजौंणा की नकल बि कायी। यखम सवाल यौं च कि आखिर द्वी भगवानु का बीच इन्नि तुलना करणा कु मतबल आखिर क्या च?
भगवान राम अर भगवान कृष्ण द्विया सनातम परंपरा का आराध्य छन। द्वियौं का स्वरोप, लीला अर अलग-अलग छन, यांका बाद बि द्वियों की महत्व तैं एक दूसरा दगड़ि नीं तोले जै सकदु।
भगवान श्रीकृष्ण का त्रिभंगी रूप ऊंकी पछ्याण च, त बंसुरी बजौंणु ऊंकी लीला हि हिस्सा च अर भगवान राम कु धनुष ऊंका मरजादा पुरुषोत्तम रूप कु प्रतीक च।
धीरेन्द्र शास्त्री बयान मा सबसे जादा खास अर खराब बात व या च की ‘हमर वळु अर ‘तुमर वळा’। क्य यु भगवान तैं बंटणा कु काम नी च? आखिर भगवान हमरा अर तुमरा कब बटिन ह्वेग्यीन? क्या भगवान राम तैं मनण वलु भगवान कृष्ण कु भक्त नीं ह्वे सकदु या फेरि कृष्ण तैं मनण वलु राम कु भक्त नीं ह्वे कसद?
भारत देसा की धार्मिक परंपरा मा भगवान राम अर कृष्ण का भक्तु का बीच क्वीं दिवाल नी च। एक मनखि रामचरितमानस कु पाठ बि करदु त श्रीमद्भागवत कथा बि सुणदन। इन्न मा मंच बटि भगवान कृष्ण तैं लेकैकि इन्नि भाषा समाज से जोड़णा कु ना बल बटंणा कु हि काम च।
हां विवाद बढ़णा का बाद धीरेन्द्र शास्त्री न सफै द्यायी की उन्न या बात ठट्ठा अर भक्ति भाव मा बोलि। उन्न बोलिकि उंकु इरादा कैकि भावना तैं चोट पौछांण कु कतै नीं छायीं। अगर कैकि भावना आहत हूंयीं त मि सब्यौं से माफी मंगदु। लेकिन यांका बाद यु सवाल खतम नीं हूंदू। मंच बटि बोलि बात कु लोगु फर क्य असर होलु यांकी जिम्मेबरि कु ल्यालु? लाखु लोग जब कथावाचक तैं सुणदन त वुका बोल्यां शब्द कु असर समाज फर बि हूंद। धर्म का मंच पर बैठण वला मनखि का बोल्यां शब्दु कु असर एक साधारण मनखि से जादा हूंद। इल्लै वेथैं ब्वलद्दा यी बाति कु खास ध्यान रखण चैंद की ऊंकी कैबि बात से कैकि आस्था तैं चोट नी लग्यां अर समाज तैं बंटणा कु क्वीं रैबार समाज का बीच नी जालु।
भगवान कृष्ण कु नौं तैं ट्यढु बतौंण वला धीरेन्द शास्त्री तैं पैलि जरा अपडु नौ का बारम बि ब्वन चैंद अर बतौंण चैंद की ऊंकु असली नौ क्या च? धीरेन्द्र शास्त्री कु असली नौ मा भगवान कृष्ण कु नौं जुडयूं च, ऊंकु असली नौ धीरेन्द्र कृष्ण गर्ग च। अब भगवान कृष्ण कु नाैं कु ठट्ठा लगौंण से पैलि धीरेन्द्र शास्त्री तैं अपडु नाैं का बारम बि बतौंण चैंद कि क्य ऊंतै अपडु नौं बि ट्याढु दिख्येंदु?
अब एक हौरि बि खडु हूंद कि भगवान तैं दूसर से श्रेष्ठ बतौंणा जरुरत आखिर किलै पोड़ि। यांकु जवाब त धीरेन्द्र शास्त्री हि दे सकदन। पर हाँ! धीरेन्द्र शास्त्री तैं भगवान राम की महिमा बतौन्दा भगवान कृष्ण तैं ट्याढु अर भगवान कृष्ण का गुणगान करदा भगवान राम तैं कम बतौंणे क्वीं जरुरत नीं च। किलैकि आस्था का काम लोगु तैं जोड़णा कु च, ना कि बंटणा कु। भगवान का आदर्श लोगु तैं जोड़णा कु च, ऊंका आदर्श तैं जिन्दगि मा उतरणा की जरुरत च। ना कि ऊंका नौ फर समाजम दीवाल खड़ी कैकि लोगु तैं द्वी हिस्सों मा बंटणा कु। ‘भगवान राम अर कृष्णा का भक्तु तैं बांटिकि कबि बि कैकु भलु नी होलु? धर्म का मंच बटि त आस्था कु सम्मान हूंण चैंद, तुलना अर बंट्वारु ना।
