घुसपैठिया बयान, आखिर कैकु अपमान?

राजनीति मा बयान देंणु क्वीं नै बात नीं च। सत्ता अर विपक्ष कु एक-दुसरा फर अरोप लगाणु राजनीति कु हिस्सा बणिग्ये। हाँ जब राजनीतिक फैदा का वास्ता कै प्रदेसा लोगु खुणि कुछ ब्वलें जांद अर ऊंकी पछ्याण फर सवाल उठ्यें जन्दिन, त यु सिरफ राजनीतिक बयान नी रै जांदु, बल देस की एकता, संवैधानिक मूल्यौं कु अर भै-भ्यात से जुड़यू सवाल बणि जांद।

समाजवादी पार्टिक अध्यक्ष अखिलेश यादव कु ब्वनु की उत्तरप्रदेस मा सबसे बड़ा घुसपैठिए उत्तराखण्डा का लोग छन। यां फर कै सवाल खड़ा हूंदन। क्य दूसर प्रदेस बिटि ऐकी उत्तरप्रदेस मा काम-धाम करण वला, या फिर अपडु़ रुजगार करण वला भारत का रैवासियों तैं घुसपैठिया ब्वनु कन्नुकैकि सै च? क्य राजनीतिक छिच्छेड़ा (असहमति) अर चुनावी बयान का खोळ (आड़) का पिछने लुकी कि कै प्रदेसा लोगु कु मान तैं ठेस पौछ्यें जै सकद?

घुसपैठिया शब्द कु मतबल कैका क्षेत्रम गलत तरीका, गैरका‍नूनि या फेरि कब्‍जा कैकि रैंण वला मनखि से हूंद। भारत देसम एक प्रदेस बटि दूसर प्रदसेम, रुजगार वास्ता, पढ़णा का वास्ता जाणु, या फेर नौकरि करणा का वास्ता जाणु अर वखि रैंणु क्वीं घुसपैठ नीं च, बल हमर संविधान अर कानून हरेक भारत देसा मनखि तैं यु अधिकारी दिंद।

इन्न मा उत्तराखण्ड बटि उत्तरप्रदेस जैकि बस्यां लोगु तैं सिरफ ऊंकी पछ्याण का अधार पर घुसपैठिया ब्वनु कतै सै नीं ब्वलें जै सकदु? अगर उत्तराखण्ड का रैवासी उत्तरप्रदेस मा घुसपैठिया छन, त फेर उत्तराखण्ड मा रैंण वला उत्तरप्रदेस का मनखि का वास्ता क्य ब्वलें जालु? अर क्य या बात देसा हरेक मनखि का वास्ता बि होलि, जु अपणि जनमभूमि से भैर दूसर प्रदेसम रैंणा छन?

अखिलेश तैं या बाद नी बिसरण चैंद की उत्तराखण्ड प्रदेस बि उत्तरप्रदेस बिटि अलग ह्वे की बणि। नौ नवम्बर 2000 मा उत्तरप्रदेस बटि उत्तराखण्ड एक अलग राज्य बणि। यीं कारण छन कि द्वी राज्यु का बीच सामाजिक, सांस्कृतिक अर आर्थिक रिस्ता छन। द्विया प्रदेसा लोगुन एक दगड़ा रैनी। अर आज बि ऊंकी कुटुम्दरि, काम-धाम अर सामाजिक रिस्तों का जलड़ा द्वी प्रदेसुमा तक फैल्यां छन।

उत्तराखण्ड कु अलग प्रदेस बणणु वैकी अलग भौगोलिक स्थिति, सांस्कृतिक पछ्याण अर विकास की जरुरत अर जनआंदोलन से जुड्यूं रै। अलग प्रदेस बणणा कु यु मतबल कतै नीं च कि उत्तराखण्ड अर उत्तरप्रदेस क लोग एक दुसरा का दुसमन बणिग्यीं।

प्रदेसा केर (सीमा) प्रशासनिक व्यवस्था तय करद, देसा रैवासियों की मानवीय गरिमा ना। उत्तराखण्ड की अपणि पछ्याण च अर यीं पछ्याण कु मान (सम्मान) करे जाण चैंद। इन्नि उत्तरप्रदेस का रैवासियों की पछ्याण कु मान बि हूंण चैंद।

अब सवाल खडु हूंद अखिलेश यादव जना राजनेता तैं उत्तराखण्ड लोगु तैं घुसपैठिया ब्वना की जरुरत किलै ह्वे? यांका पिछने क्वीं खास बात, या क्वीं खास चाल च, या फेर सिरफ अपड़ा राजनीतिक फैदा का वास्ता इन्न बयान दिएग्यायी? अगर अखिलेश तैं उत्तरप्रदेसम रुजगार, जनसंख्या, संसाधनु तैं लेकैकि क्वीं दिक्कत च, त यांका बारम चर्चा हूंण चैंद। यीं दिक्कत का वास्ता दूसर प्रदेस रैवासियों तैं जिम्मेदार मनणु कतै सै नीं च।

उत्तराखण्ड अर उत्तरप्रदेस का बीच आपस मा दंदु नीं हूंण चैंद। उत्तराखण्ड का लोग उत्तरप्रदेसम काम करणा छन त उत्तरप्रदेसा लोग बि उत्तराखण्ड मा रैकैकि अपणु रुजगार करणा छन। अब अगर एक प्रदेसा लोगु दुसर प्रदेसा लोगु तैं घुसपैठिया बोलिकि अपमान काराला, त यां से हौरि कैकु ना बल द्विया प्रदेसु का लोगु कु हि नुकसान होलु।

अब सवाल यों बि च कि अगर भारत कु संविधान देसा हरेक रैवासी तैं देसा भितर कखि बि आण-जाणु अर रैंणा कु अधिकार दिन्द। तब भारत का रैवासियों तैं प्रदेसा कैर (सीमा) का अधार फर सक (संदेह) से दय्खणु कु क्या मतबल? क्या देसा भै-भ्यात सिरफ भाषणु अर नारौं तक हि हूंण चैंद, या फेरि हमरा ब्यौहार व राजनीतिक भाषा मा दिख्येंण चैंद?

भारत राज्यौं कु संघ च। ऐकी तागत विविधता, संवैधानिक व्यवस्था मा हि च। क्वीं मनखि उत्तराखण्ड कु, उत्तरप्रदेस कु, बिहार कु या फेरि महाराष्ट्र कु या फेर कै हौरि हिस्सा कु भारतीय रैवासी हूंणा कारण वेकु मान अर अधिकार का सम्मान हूंण चैंद

अखिलेश यादव तैं उत्तराखण्डा रैवासियों फर क्वीं टिप्पणी करण से पैलि स्वचण चैंद की ऊंकी घरवळि डिंपल यादव बि उत्तराखण्डै मूल रैवासी च। अब क्य डिंपल बि घुसपैठिया च?

अखिलेश तैं अपड़ि बयान का बारम बताण चैंद की आखिर ऊंकु ब्वना कु मतलब क्य छायीं।
यखम सवाल सिरफ उत्तराखण्डै रैवासियों कु मान कु ना, बल भारत देसा नागरिकता अर संवैधानिक मरजादा कु बि च।

राजनीति मा विचारु मा अणबण ह्वे सकद, अर आलोचना भी ह्वे सकद। लेकिन यांका बाद बि प्रदेसा रैवासियों कु मान अर राष्ट्रीय एकता से कतै समझौता नी करे जाण चैंद। देस कु संविधान हमतैं अधिकार हि नीं देंदु, बल एक-दुसरा कु मान अर अर समानता की भावना बणैकि रखणा की जिम्मेबरि भि दिन्द।इल्लै राजनीतिक दल अर ऊंका नेतौं तैं क्षेत्रीय पछ्याण तैं हथ्यार बणौंणा क बजाय संवैधानिक मूल्यों तैं मजबूत करण चैंद। नेतौं की जिम्मेबरि सिरफ अपणा समर्थक तैं खुस करणु हि ना, बल समाज मा सद्भाव बणैकि रखणा की बि च।

उत्तराखण्ड अर उत्तरप्रदेसा बीच रिस्तौं मा अणबण ना, बल भै-भ्यात, एक दुसरा कु सम्मान अर मदत की भावना बणि रैंण चैंद। आखिर प्रदेस अलग ह्वे सकदन, पर देस एक च। भारत कु संविधान हरेक नागरिक तैं अधिकार देंद अर एक दुसरा कु मान करणा की जिम्मेबरि बि सिखान्द। राजनीतिक दल अर नेतौं तैं या बात कतै नी बिसरण चैंद की अपड़ा चुनौ का फैदा का वास्ता कैबि प्रदेसा लोगु की पछ्याण अर मान तैं ठेस पौंछाणु लोकतांत्रिक मरजादा का वास्ता सै नी च।

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