‘कॉकरोच’: सड़कि बटि संसद तक
अगर सड़कें खामोश हो जाएंगी, तो संसद आवारा हो जाएगी।’
डॉ. राममनोहर लोहिया की या लैन आज सच्च साबित हूंणि छन। मानसून सत्र कु पैलि हि दिन दिल्ली का जंतर-मंतर बटि संसद तक प्रदर्शनकारियों की भीड़ या गवै दींणि छायीं, जब संवाद कु लोकतांत्रिक बाटु सँगुड़ा (संकरे) ह्वे जन्दिन, त लोगु कु गुस्सा सड़कियों म ऐ जांद। हजारों युवा अर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ कु झण्डा का नीस देसा कुणा-कुणा बटि अयां ज्वानु कु संसद कूच, हमरि व्यवस्था अर सरकार खुणि बड़ी चेतावनी च।
28 जून बटि जंतर-मंतर पर सुरु हूंयू यु प्रदर्शन क्वीं अचाणचक नीं भड़की।
सरकार न सुरु बटि सोचि की यु एक छ्वटु-म्वटु अर कुछ दिनु कुु हि प्रदर्शन च, सरकरै बड़ी भूल साबित ह्वेग्ये। अगर सरकार बग्त फर यु युवा से बात करदि त सैद बात इतगा अगनै नि बढ़दि। बग्त फर प्रदर्शनकारियों से बात नीं करणा की सरकारै जिद, सरकार की बौत बड़ी गलती साबित ह्वेग्ये।
कन्न कैकि बणि कॉकरोच जनता पार्टी
15 मई 2026 खुणि भारत का मुख्य न्यायाधीशन एक सुणै का दौरान बेरूजगार ज्वान अर व्यवस्था पर सवाल उठौंण वला एक्टिविस्टु का खिलाप बोलि। उन्न बोलिकि कुछ ज्वान, जु बेरुजगार छन अर जौ मा क्वीं काम नीं च, वु कॉकरोज अर परजीवी की तरौं ब्यौवार करदन, अर बाद मा मीडिया, सोशल मीडिया अर आरटीआई कार्यकता बणिकि व्यवस्था पर सवाल खड़ा करदन।
हलाँकि यांका बाद अगिल दिन उन्न यु साफ कायी की, उन्न या बात बेरुजगारु का खिलाप नीं बोलि छायीं, उन्न या बात नकली डिग्री अर सिस्टम कु गलत फैदा उठौंण वला का खिलाप बोलि छायीं।
पर तब तक त मुख्य न्यायाधीश की या बात ज्वानु का जिकुड़ि भितर जखम कै ग्यायी अर यांका विरोध मा उन्न अप्फु तैं कॉकरोच ब्वनु सुरु कै दे। कॉकरोच एक इन्नु जीव च जु हरेक दसा मा बि ज्यूंदू रैंद।
यांका बाद बोस्टन मा रैंणु वला अभिजीत दीपके न ऑनलैन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ प्लेटफॉर्म त्यार कायी। बेरूजगार अर व्यवस्था से नराज ज्वानु की ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ कु सारु (समर्थन) मिलिग्ये, यांका दगड़ि बेरुजगारी इमत्यान मा घपरोल, पेपर लीक जन्न मामला उठौंणा कु एक नै मंच मिलिग्ये। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ज्वानु की नाराजगी व्यक्त करणा कु एक तरीका बणिग्ये। युवा अप्फु तैं व्यवस्था से निरास महसूस करणा छन। अपणि मौजूदगी बतौंणा वास्ता ऊंतै अपणु कुराध सड़कियों मा दिखौंण प्वडुण च।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ कु जंतर-मंतर पर धरणा कु बडु कारण पेपर लीक अर ज्वानु की भवेष्य से जुड़यूं मामलु का खिलाप अवाज उठौंणु च।
नीट प्रवेश इमत्यान मा गड़बड़ि अर लीक हूंण से लाखों छात्रु कु भवेष्य पर सवाल खड़ा कै दींन। छात्र यांका खिलाप जांच की मांग करणा छायीं अर केन्द्रीय शिक्षा मंत्री कु इस्तीफा मंगणा छन। या बात बि सै च की बार-बार हूंणा पेपर लीक अर अर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की असफल हूंणा की जिम्मेबरि सरकार तैं लिंण चैंद।
ज्वानु कु गुस्सा यीं बात फर च कि ऊंकी समस्या पर संसद मा क्वीं संवेदनशीलता अर हल हूंणा की उमेद त ऊतैं कतै नी दिख्येणि च।
आज जब युवा सड़क मा छन त यांका पिछने बि खास कारण च। लोकतंत्र मा ज्वानु कु गुस्सा कबि बि बिना कारण कु नी हूंदू। जब देस का सबसे जादा ऊर्जावान आबादी तैं अपणु भवेष्य अंधेरू दिख्येंणु च, त ऊंकु सड़किमा उतरणु कतै गलत नी च।
सड़क अर संसद का बीच टकराव कैबि लोकतंत्र खुणि कतै अच्छु नी च। हां अब सरकार तैं यु समझण प्वाड़लु कि लोकतंत्र खुणि सड़कियों की अवाज तैं संसद तक पौंछणु बौत जरूरी च। सड़क की अवाज तैं चुप्प करणा कु तरीका लाठु कतै नी च, बल यांकु तरीका संवाद च।
सरकार अब बि अपणा आंखा नी खोलदि, या छात्रु कु यु कुरोध सरकार खुणि एक बड़ी चुनौती बणि सकदु। सरकार तैं ज्वानु की गुस्सा ‘कानून-व्यवस्था कु संकट’ मनण क बजाय सुधार कु मौका मनण चैंद।
सिरफ भरोसु देंणा बजाय, सरकार तैं ज्वानु की मांग पर विचार करण चैंद अर ऊंकु मांग फर विचार करण चैंद। मानसून सत्र मा सरकार तैं अगनै बढ़िकैकि ये मुद्दा फर चर्चा करण चैंद। अर देस तैं बतौंण चैंद की संसद देसा ज्वानु की बात सुणणा खुण सदनि तैयार च।
