हरेला फर भारी, विकास कु कुल्हडु

उत्तराखण्ड कु लोक तिवार ‘हरेला’ (16 जुलाई) खुणि सर्या प्रदेस रैवासी एकदा दुबरा हरियाली की उमेद मा नै-नै डाळा लगैकि पर्यावरण तैं बचौंणा की सौं ल्याला। सरकरि दप्तर, इस्कुळ बटि प्रदेसा रैवासी घार-घार मा डाळा लगला।

पर लोक तिवार हरेला का बीच ऋषिकेश देरादूण राजमार्ग बटि जु खबर औंणि च वां आंखि हि ना बल जिकुड़ि बि रूणि च।

राष्ट्रीय राज मार्ग कु चौड़ी करणा क् अर फ्लाईओवर बणौंणा का नौं फर 3000 से जादा डाळा तैं कटण कु विरोध तेज ह्वेग्ये।

इन्न मा सवाल खडु़ हूंणू च एक तरफा हम हरेला लोक तिवार पर पर्यावरण बचौंणा सौं लिंणा छा, वखि दूसर तरफा विकासा नौं फर डाळौं की मूंण (गर्दन) गिंडौंणा छा?

उत्तराखण्ड जन्ना पाड़ि प्रदेसम ‘हरेला- सिरफ ऐ लोक तिवार हि नी च, बल हरेला तिजवार प्रकृति कु धन्यवाद करणा कु हमरा संस्कार छन। पर आज देरादूण-ऋषिकेश राजमार्ग फर जब डाळौं कटेणा छन, त हमतैं यु स्वचण प्वड़णु च की हमरि पैलि प्राथमिकता क्या च? यामा क्वीं सक नी च की कनेक्टिविटी अर बुन्याद ढांचा कैबि प्रदेस प्रगति का वास्ता बौत जरूरी छन। चौड़ी सड़क, पर्यटन तैं अगनै बढ़ौंणा का वास्ता अर सफर तैं असान बणौंदन। अच्छी सड़क बग्त की जरुरत बि च पर यांकु यु मतबल कतै नीं च ‘विकासा नौं पर बणण वलि योजना का बाटा मा औंण वला हऽरु-बोण (हरे-भरे जंगल) तैं हि खतम द्युळा।

बडु सवाल हि यौ च कि देरादूण-ऋषिकेश का सात मोड़ मा सड़क तैं चौडु करणा वास्ता क्वीं हौरि तरीका (विकल्प) नीं खोजे जै सकदु छायीं, जै से डाळों तैं कटण से बच्यें जै सक्यां?

प्रदेसम ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान चलणु च, अभियान बौत अच्छु च। लोग अपणि माँ का सम्मान मा डाळा लगौंणा छन। पर स्वाचा, जौ डाळों न सालु बटि हमतैं ऑक्सीजन द्यायी,
जौ डाळु फर चखुळों न अपणा घोल (घोसला) बणैंन, क्या वु यीं धरति मां का हिस्सा नीं छायीं?

आज एक नै डाळु लगैकि हम अपणि जिम्मेबरि से भागी नी सकदा। किलैकि एक छ्वटु डाळा तैं बडु हूंणा म सालु लगदन। आज जु डाळा कटणा छन, वुकी जागा नै लग्यूं डाळु नी ले सकदु। हरेला तिवार तबि सुफल होलि जब हम नै डाळु लगौंणा दगड़ि पुराणा डाळों तैं बि बचौंणा सौं ल्यूला। अर अब सरकार तैं बि समझण प्वाड़लु कि विकास वु नी च जु प्रकृति तैं नुकसान कैकि अयां, बल विकास वु च जु प्रकृति तैं बिना नुकसान पौंछेकि करे ज्यां, नथर हम औंण वळि पीढ़ि तैं चौड़ी सड़क त दे द्युला, फर सांस लिंणा का वास्ता सुद्ध हवा कख बिटि ल्योला?

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