मित्र पुलिस या फेर . . .
उत्तराखण्ड सतपुली मा 20 साल एक नौना की आत्महत्या की खबरन सर्या उत्तराखण्ड तैं झंटोळ द्यायी, अर मित्र पुलिस की असल रूप बि लोगु का समणि ऐग्ये। एक नौना न फांस लगौंण सी पैलि सोशल मीडिया मा वीडिया बणै की डाळि अर बोलिकि कि -मि ‘उत्तराखण्ड पुलिस पर भरोसु नी करदु’, पुलिस प्रशासन कु मुण्डम एक कलंक च।
खबर सिरफ झंजोड़णि नी च बल पुलिस का काम करणा तरीका पर बि सवाल खड़ा करणि च। या एक व्यवस्था क खिलाप, निरास अर बेजति की नतीजा च, जै तैं एक नौनु बरदास नीं कै साकु।
उन्न त पुलिसा कारवै क बाद जु बि दोषी च वैमा अप्फु तैं निर्दोष साबित करणा वास्ता कानून की रस्ता हूंद। पर जब क्वीं नौनु अपणि जिन्दगि तैं खतम करण से पैलि वीडियो बणै की वांकु कारण बतौंन्दु अर पुलिस फर घपकौंणा कु आरोप लगान्द, त मामला सिरफ नियम कु पालन करणा कु नी रैं जांदु। पंकज कु यु वीडियो एक-डाइंग डिक्लेरेशन (म्वरण से पैलि) जन्न च।
पुलिस कु ब्वनु च कि नौना की टक्कर ह्वे अर वैंथै चोट लगि, वैंकि शराब पीं छायी। अर नियम यु ब्वदिन कि क्वीं बि नशा कैकि गाड़ी चलौंणु च, त एमवी एक्ट मा वैकी गाड़ी तैं सीज करणु जरुरी च। पुलिसन वु काम कायी।
पर फेर सवाल त वीं च कि क्या पुलिस तैं मारपिटै की हक च? पंकजन वीडियो मा ज्वा पिड़ा बतै व हमरू कानून व्यवस्था की संवेदनशीलता तैं बतान्द। पंकज कु ब्वनु च कि मि से गलती ह्वे त मितैं विंगये (समझाया) जै कसदु छायीं कि त्वैन गलत कायी। मितैं गाळी देंणा कु क्य मतबल।
पुलिस की मूल भावना पर सवाल खड़ा करदु। पुलिस तैं कानून न अधिकारी लोगु की सुरक्षा वास्ता दियां छन ना कि कैकु अपमान करणा वास्ता।
पुलिस कु काम अपराध तैं रवक्णु अर कानून की डैर दिखाणा कु च, पर हां या डौर इतगा जादा नीं हूंण चैद कि मनखि निसाब की उमेद छोड़िकि अपडि जिन्दगि तैं हि खतम करण बारम स्वचयां।
अब अगर देवभूमि मा पुलिस फर कैथे सतौंणा का अरोप लगणा छन त या पुलिस विभाग अर शासन का वास्ता चिंतै बात च।
‘मित्र पुलिस’ सिरफ नारों अर थाणों की पाळियों मा ल्यखण खुणि नीं हूंदू। पुलिस तैं त दोस्ति तब जादा दिखाण चैंद जब क्वीं कमजोर थाणा आ आंद।
पर सतपुली की या घटना बतौंणि च कि पुलिस कु व्यवहार मनखि कु कीसा (जेब) अर असर (रसूखदार) देखिकि बदलि ह्वे जांद। मोटर व्हीकल एक्ट मा चालान अर गाड़ी सीज करणु कानूनी काम च, पर यांका दगड़ि कैथै घपकौणा (पिटने) कु अधिकार पुलिस तैं कनै द्यायी।
हां अगर ऐ मामला म सै जांच होलि अर दोषी पुलिसा दगड़ि, पुलिस पर दबाब बणौंण वला असरदारु लोगु पर कारवै नीं होलिे त, जनता कु भरोसु पुलिस फर बटि उठि जालु।
कानून लांठु से ना बल कानून निसाब अर व्यवहार से चलदु। जब रक्षक हि भक्षक बणि जाला त लोकतंत्र मा चौथु स्तंभ अर समाज द्वियों तैं अवाज उठौंण प्वाड़लि। यखम सरकार तैं बि समझण प्वाड़लु कि उत्तराखण्डै जनता पुलिस कु लांठु ना बल पुलिस कु हत्थ चांद।
