बिस दवै मा ना बल बिस त . . . . . .
उन्न त छ्वटा बच्चों तैं खासी-जुकाम हूंण रैंद, अर छ्वटा बच्चों तैं बिना डॉगटर सलाह से क्वीं बि दवै दींणु बौत खतरनाक ह्वे सकदु। कतगै ब्वै-बुबा अपड़ा बच्चों की खांसी तैं ठीक करणा वास्ता बिना डॉगटर से पूछयां दवै दे दिन्दन, किलैकि या बच्चों तैं हौरि तकलीप ह्वे सकद।
यांका बाद अगर डॉगटरै हि बच्चों तैं गलत दवै देलु त यांकु दोषि कु होलु? यु सोचिकि कि शरैल झर्र ह्वे जान्द कि ज्वा दवै बच्चौं तैं वैकि तबियत ठीक करणा वास्ता दिये जान्द, वा दवै वे बच्चौंक मौत कु कारण बणि जान्द। हां यु सच्च च। मध्यप्रदेसा छिंदवाड़ा अर राजस्थान कुछ जिलौं बिटि ज्वा खबर ऐ, वीं खबरन सर्या देस तैं झक कै द्यायी।
बच्चों कि किडनी फैल हूंणा कु कारण ‘कोल्डरिफ’ नौ कु एक कफ सीरफ च। ऐ मामला छिंदवाड़न पुलिसन दवै दैंण वलु डॉगटर पर केस कै याली अर खांसी दवै बणौंण वलि कंपनी पर केस कैकि मालिक तैं दोषी बतै अर पकड़ि याली।
सेंट्रल ड्रग टेस्टिंग लैबोरेट्री (सीडीटीएल) चेन्नई मा सीरप जांच मा समणि ऐ कि दवै की गुणवत्ता सै नीं च। सीडीटीएल भारत क सात राष्ट्रीय प्रयोगशाला म से एक च, ज्वां दवै अर रिसर्च अर समीक्षा करदि। दवै का नमूनम जांच म एक बात समणि ऐ कि दवै म जहरीलु पदार्थ छायीं। खांसी दवै मा एंटीबायॉटिक छायीं। छिंदवाड़ा ब्लॉक मेडिकल ऑफिसरा रिपोर्टा आधार पर डॉ पर केस दर्ज ह्वेग्ये किलैकि ये मामला मा जादा बच्चों कु इलाज डॉगटर प्रवीण सोनी हि कै छायीं।
प्रवीण सोनी न हि बच्चौं की खांसी वास्ता कोल्डरिफ दवै लेखि छायी।
मध्यप्रदेस सरकारन दवै बणौण वलि कम्पनी अर डॉगटर तैं पकड़ि याल पर सवाल बि च कि क्य यांका दोषी यी द्विया छन।
सवाल सिस्टम पर बि छन जु आज 14 बच्चों कु मौता बाद खळाखळ दवै ब्यचण वला दुकानदारु पर छापा मरणु च, वु पैलि कख स्यूं छायीं।
यामा मा सबसे बडु गुनाहगार दवै बणौंण वलि कम्पनी हि च, पर यखम सबसे बडु गुनाहगार त हमरु सर्या सरकरि सिस्टम च।। किलैकि जब जिन्दगि देंण वलि दवै हि जिन्दगि लिंण बैठि जाली त, समझम ऐ जाण चैंद कि जहर दवै मा ना बल बिस (जहर) हमर सिस्टम भितर तक घुसि ग्यायी।
पर इन्नु क्वीं पैलि बार नी ह्वै या। से पैलि साल 2020, 2022 अर 2023 मा बि डायएथिलीन ग्लाइकोल ये बण्यूं सिरपन बच्चों की जान ले छायीं। तब बि जांच ह्वे, रिपोर्ट बि ऐ। विश्व स्वास्थ्य संगठन चेतावनी बि द्यायी। यांका बाद बि हमन कुछ नी सीखि।
कारवै क नौ फर केवल बजार बिटि दवै वापिस मंगौंण अर अधिकारी तैं निलंबित करण से कुछ नीं होलु। ऐ मामला म कसूरबार तैं इन्न सजा हूंण चैंद कि दुबरा इन्न करणा कैकि बि हिकमत नीं ह्वे सक्यां। हमतैं यांका वास्ता कड़ी सजा क दगड़ि दवै बणौंण वलि कम्पनी क जिम्मेबरि बि तय करण प्वाड़लि।
या सिरफ खांसी दवै का बात चीं च बल या भरोसा बात बि च, वु भरोसु जु लोग डॉगटर पर करदन। इन्न मा सवाल खडु़ हूंणू च कि क्य रुप्या कमाणौं इंसान से बडु ह्वेग्ये? क्या अब छ्वटा बच्चों की जान बि व्यापार कु हिस्सा बणिग्ये?
गलत खांसी दवै या फिर जादा दवै से बच्चों तैं चक्कर,उल्टी, सुस्ती जन्नि दिक्कत ह्वे सकदन। कुछ खांसी दवै त लिवर अर किडनी तैं खराब कै सकदन। बिना बिमरि कु कारण पछ्याणि दवै दींण से बिमरि का असली कारण समणि नीं आंदु अर इलाज मा देरी ह्वे जांद।
यांका बाद बि डॉगटरन ज्वा दवे 5 साल से बड़ा बच्चों खुणि छायीं वा दवै 5साल से छ्वटा बच्चों तैं दे द्यायी। जब डॉगटरै लेखि दवै हि बिस बिणि जाली त लोग कै फर भरोसु कराला। इन्न मा त लोगुकु डॉगटर पर बिटि भरोसु टूटि जालु अर डॉगटर पर बटि भरोसु टूटण हौरि बडी़ बिमरि च।
या सिरफ खांसी दवै का बात नीं च, या वै भरोसा बात बि ज्वा लोग डॉगटर पर करदन। यखम स्वचण वलि बात च कि ज्वा दवै जिन्दगि देंद वा दवै हि जिन्दगि लिंण बटि जाली त समझम आंद कि बिस (जहर) दवै मा नीं च, बिमरि मनखि शरैल नीं च बल बिमरि हमरु सर्या सिस्टम च, पैलि यांकु इलाज हूंण चैंद।
