माँ धारी देवी
देसम कै पूरण मंदिर छन अर यु से जुड्यां बौत सर्या चमत्कारै बात हमतैं सुणण खुणि मिलदि
उत्तराखण्डम इन्नु एक मंदिर च जख माँ की मूर्ति दिनम तिनदा अपणु रूप बदली करदि। यु चमत्कारी मंदिर माँ धारी कु च। जु बदरीनाथ केदारनाथ क बाटम अलकनंदा क बीचम एक पुरणू अर शक्तिपीठ च।

धारी माँ तैं उत्तराखण्डै गढ़वाल क्षेत्रा कुल देवी अर रक्षक देवी बि मन्यें जांद। माँ धारी तैं चर्या धामु खास कैकि बदरीनाथ, केदारनाथ धामै रक्षक देवी ब्वलें जांद।
मंदिर बारम बतै जांद की एक राति बौत बरखा ह्वे अर अलकनंदा बौत तेजी बगणि छायीं त गौं क नजीक एक ब्यटुलै अवाज सूणैं द्यायी, गौं वळोंन जब जैकि देखि त वख क मूर्ति पाणिम छायीं। गौं वळों न वा मूर्ति पाणि बटि भैरि निकाली। त उबरि हि देवी न वीं मूर्ति स्थापना कु आदेश द्यायी। धारी गौं का लोगुन वीं जगा मा हि मूर्ति स्थापित कै दे।
मंदिर मा मां धरी की पूजा गौं का पंडित हि करदन। यखक पुजारि ब्वदन की मंदिरम माँ धरी की या मूर्ति द्वापर युग मा स्थापित ह्वे। माँं कालीमठम काली माँ की मूर्ति क्रोध मुदा म च, पर धारी देवी मंदिरम मां काली की प्रतिमा शांत मुद्रा म च। मंदिर मा लगि मां की प्रतिमा साक्षात अर जाग्रत अर पौराणि काल बिटि च।
जनश्रुति च कि मां काली की या प्रतिमादिन मा तीन दा अपण रूप तैं बदलि करदि। सुबेर माँ कन्या, त द्वफरम माँ ज्वान, त ब्यखुनी दा माँ दानी बुड्ड़ि (वृद्धा का) रूप तैं धारण करदि।
मंदिर म चैत अर शरदीय नवरात्रौं पर लोगु दुर दूर बिटि यख औंदन अर माँ का दर्शन करदन वास्ता औंदन।
माँं धारी देवी कु मंदिर श्रीनगर बिटि लगभग 15 किलामीटर दूर कलियासौडम च।
