लोकतंत्रै तागत संवाद च, ना की . . .
उत्तराखण्ड प्रारंभिक शिक्षा निदेशक का दप्तर मा ज्वा मारपिटै ह्वे, वांका चार दोषियों तैं पुलिसन पकड़ि याली। प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय मा रायपुरा विधायक उमेश शर्माक् समणि ज्वा मारपिटै की घटना ह्वे वा घटना चिंता वलि च।
शिक्षा निदेशालय जना संस्थान मा विधायकक् समणि निदेशक दगडि मारपिटै की घटना एक मनखि पर हमला नीं च, बल या घटना संस्थागत गरिमा, प्रशासनिक स्वायत्तता अर लोकतंत्र पर बि हमला च। लोकतंत्र मा क्वीं बि मनखि, फिर वु विधायक हि किलै ना हूयां कानून से मत्थी नीं च।
शिक्षा विभागै दप्तर मा सिफर नौकरी हि ना बल भवेष्य बणौंणा कु काम हूंद। शिक्षा मंदिर मा इन्न घटना समाज तैं गलत रैबार हि देलि कि क्या तागत अर दबाव, संवाद से मत्थी च?
यखम रायपुरा विधायक उमेश शर्मा काउ सबसे बड़ी नैतिक जिम्मेबरि छायीं किलैकि वे जनता का प्रतिनिधि छन। ऊंका समणि, ऊंका समर्थक अगर लडै़ करदन, त ऊंकी नैतिक जिम्मेबरि पर सवाल त खड़ा होला हि कि उन्न वै बगत अपणा समर्थकु तैं रोकणे कोसिस किलै नी कायी?
रायपुर विधायक उमेश शर्मा की विधानसभा मा एक इस्कुला नौं बदलि हूंण छायीं। यीं मामला तैं लेकैकि शिक्षा निदेशक दगड़ि मारपिटै ह्वे।
अब विधायक तैं क्वीं यु बतौंदु की ये मामला मा गौं कु प्रधाना तरफां बिटि एक प्रस्ताव बिणिकि इस्कुला प्रधानाचार्य जरिया विभाग तैं फटय्यें (भेजा) जांदु।
लोकतंत्र मा सब जनप्रतिनिधियों तैं अपणि जिम्मेबरि कु अहसास हूंण चैंद। अगर विधायक का शिकैत पर प्रारम्भिक शिक्षा निदेशक क्वीं कारवै नीं कै सकणा छायीं त, विधायक तैं अपणि बात सचिव, शिक्षा मंत्री अर जादा हूंद त मुख्यमंत्री तैं बतौंण छायीं। यखम सवाल यौं बि च जब विधायक उमेश शर्मा मा अपणा काम वास्ता मुख्यमंत्री तैं बतौंण कु अधिकार छायीं त उन्न अपणा अधिकारू कु उपयोग किलै नीं कायी?
क्वीं बि पढय्यूं-लिख्यूं मनखि अगर मारपैटि से अपणु काम करौंणें कोसिस करदु त वैं मनखि तैं शिक्षा कु मतबल पता हि नीं च। पढ़ै त मनखि तैं सुलझ्यूं, शांत, बसम रैंण वलु अर कानून कु सम्मान करणु सिखान्द, ना कि लड़ै झगड़ा करणु।
अर अब सबसे जादा दिक्कत वलि बात च कि विधायक का सर्मथकु मा जु नौं आणा छन वा हौरि चिंता बढ़ौंणि च। इन्न मा सवाल खड़ा हूंणा छन कि विधायक तैं इन्न लोगुकि जरुरत किलै पोड़ि। अब अगर हमरा विधायक इन्ना अपराधी लोगु तैं अपणा दगड़ि लेकैकि सरकरि दप्तरू मा जाला त क्वीं बि अधिकारी कनुकैकि काम कारलु अर कन्नु कैकि सै फैसला ले साकलु?
या घटना सिरफ एक प्रशासनिक विवाद नीं च, बल या घटना लोकतांत्रिक मर्यादा कु बि इमत्यान च। जरा स्वाचा कि अगर हम शिक्षा कु मंदिर तैं राजनीतिक तागत कु मंच बणौंला त, हम औंण वलि पीढ़ि तैं गलत शिक्षा हि द्युला।
अब यीं घटनै जांच हूंण चैंद अर जु बि दोषी छन वै फर कारवै हूंण चैंद। या बगतै मांग च समाज, सरकार अर राजनीतिक लोगु तैं यीं बातिकु साफ रैबार देंण चैंद कि लड़ै झगड़ौं तैं कतै बरदास नीं करे जालु, खास कैकि सरकरि दप्तरु मा अर वु बि जख बिटि ज्ञान, अनुशासन अर नैतिकता की उज्यालु समाज तक पौंछ्दु। अर उन्न बि लोकतंत्रै असली तागत ब्वन-बच्याणम (संवाद) अर जिम्मेबरि मा च, न की लड़ै झगड़ा कैकि तागत दिखौंणम।
