खेलकि आन (गरिमा) पर दाग

मध्यप्रदेस इंदौर बिटि ज्या खबर ऐ वा बौत सरमनाक हि ना बल खेला आन (गरिमा) पर बि एक दाग च।

अज्काल देसम महिला विश्व कप क्रिकेट कु खेल चलणु च। जैमा ऑस्ट्रेलिया की महिला क्रिकेट टीम बि च। अर या खबर बि ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम से हि जुड़ि च। द्वी ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीमा खिल्वार तैं गलत नीयत से छूँणा अर पिछने करणा कु मामलन सर्या समाज तैं झक दे द्यायी।

यीं द्विया खिल्वार आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप ख्यलणा खुणि भारत मा अयीं छन। मैदाना भैर ऊंक दगड़ि जु ह्वे या हमर देसा ‘अतिथि देवा भवः’ की परंपरा पर बि सवाल खड़ु करणु च।

सुबेर 11 बजि जब द्वी ऑस्टेªलिया महिला क्रिकेट टीमा खिल्वार इंदौरा रैडिसन ब्लू होटल बिटि पैदल एक कैफे जाणा छायीं। तबि एक आदिमन मोटर सैकिल से ऊंकु पिछनै कायी अर गलत-सलत बोलि अर ऊतैं छूँणा कोसिस कायी।

या घटना हम खुणि हौरि बि चिंता बात ह्वे जांद जब हम “अतिथि देवो भवः” की अपणि पंरपरा मा सर्या देसम बडु गर्व करदन।

अब सवाल यौं च कि अबि बि ब्यटुलों की सुरक्षा मामला मा आज बि असंवेदनशील छौ, खेल जु सम्मान अनुशासन अर एकता कु प्रतीक च, वै खेला खिल्वारू दगड़ि इन्नि घटना समाज खुणि चिंता बात च।

विदेसी खिल्वार जब बि हमर देसम ख्यलणा खुणि आंदन, त सिरफ खेल हि ना बल हमर देसा संस्कृति अर खातिरदारि कु तजुर्बा तैं हि अपणि दगड़ि लिजन्दिन। इन्न मा इन्नि हरकत न सिरफ पीड़ितों की बेजति हि ना बल या देसा पछ्याण तैं बि खराब करणि च।

ये मामला मा दोषी तैं पुलिसन पकड़ियाली। विदेसी खिल्वारु दगड़ि इन्न घटना, सिरफ एक मनखि कु अपराध नीं च। या सर्या समाजै सोच अर हमर संस्कारु कु बि इमत्यान च। यु सिरफ द्वी खिल्वारू कु सम्मान कु सवाल हि ना बल यु सवाल बि च कि क्य हमरू समाज ब्यटुलौं क प्रति सै मा संवेदनशील छैंच या ना?

खेल अर खेला जगा, होटल हौरि जगों पर विदेसी मैमान कु सुरक्षा तय करण पुलिस अर प्रशासन तैं बि अपणि जिम्मेबरि हौरि अच्छी तरौं से निभाणि प्वाड़लि।

आज खेल व्यटुळों तैं मजबूत बणौंणा कु एक जरिया बणिग्ये। ब्यटुला हरेक क्षेत्रम अगनै छन अर देस कु नौं तैं रोशन करणि छन। इन्न मा अगर वु अप्फु तैं असुरक्षित महसूस करदन त या ऊं खुणि हि ना सर्या समाजै हार बि च। या घटना हम सब्यौं तैं स्वचणा खुणि मजबूरि करद कि आखिर हम कख कमजोर छा। कानून सखत च, पर हमर मानसिकता मा बदलौ हि सुधार कै सकदन।
जब हमरू समाज नौनि तैं सम्मान ना बि समानता से दख्यण नी सिखालु, तब तक इन्नि घटना हूंणि राली।

इंदौरा या घटना हम तैं स्वचणा खुणि मजबूर करणि च कि क्या हम ब्यटुलौं सम्मान कु आदर्श पर सफल छौ? अब बगत ऐग्ये कि हमतैं केवल नारा ना, बल असल जिन्दगि मा बि ब्यटुलौं की सुरक्षा अर सम्मान करण सिखण प्वाड़ल, फिर वु ब्यटुलु देसा हूयां या फिर विदेसा।

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