दोष बाघ कु ना, यांका जिम्मेबार त बल . . .

पिछल कुछ सालु बिटि उत्तराखण्डा पाड़ मा जंगली जानवरू कु आतंक भौत बढ़िग्ये। कखि रिख त कखि बाघ गौं मा ऐ जांणु च, त कखि सुंगुर, गूंणि-बांदर सर्या खेती-पाति चौपट कैरि दिंणा छन। आज पाड़ मा सबसे जादा डैर बाघ की च। पाड़ मा रैंण वला लोग डैर-डैरिकि जीणा छन। ब्यखूनी दो जन्नि धाम अच्छलेणु च, उन्नि छ्वटा नौना अर दाना-स्याना लोगुकु घार बिटि निकलणु मुसकिल ह्वे जाणु च।

अबि कुछ दिन पैलि पोखड़ा ब्लॉक, पौड़ी बगड़ीगाड़ की रानी देवी तैं बाघन मारि दे, त भटवाड़ी ब्लॉका रैथल गौं मा रिख न एक मनखि तैं घलै कै द्यायी। इन्नि घटना से पाड़ लोगु डर्या छन अर नराज बि छन। बाघा कारण सबसे जादा इस्कुल्यां नौन्याळ अर घसेरियों डर्या छन।

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराजन त वन विभाग तैं बाघ पकड़णा वास्ता पिजरा लगौंणा आदेश दे दींन। त वखि गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी न केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री तैं अपणि दिक्कत बतै अर बोलि कि यांका बारम सर्या जाणकारी हासिल करे ज्यां अर यांकु जु बि समाधान हूंया झटाझट करे ज्यां।

लोगुक गिच्चा मा एक हि सवाल च कि आखिर हमतैं बाघ से कब छुटकारा मिललु। ये सवाल कु जबाव उतगा सीधु नीं च, जगता हम समझणा छौ। किलैकि बाघ हमरु क्वीं दुस्मन नीं च। हमरि असल चुनौती बाघ नीं च, बल हमरि असल चुनौती त वा दसा च जै न आज मनखि अर बोण का जानवरू तैं अमणि-समणि खडु कै द्यायी।

अब सवाल यों च कि क्या बाघ डैर पाड़ मा अबि ह्वे अर ह्वे त किलै ह्वे? क्य पाड़ मा पैलि बाघ, रिख नी छायी? त यांका दोषि बि हम हि छा। पाड़ मा जंगली जानवरू कु खतरा क्वीं एक घटना कु नजीता नीं च, बल यु सालु बिटि बिगड़णि प्राकृतिक संतुलन की चेतावनी बि च। ये तैं हम जंगली जानवरू दिक्कत बोलिकि बौग (टाल) नी मारि सकदा। असल दिक्कत यु संतुलन च, जु हमन विकास नौं पर पैदा कायी। आज गौं-गौं मा बाघ आणा कु कारण च खळाखळ कटेणा बोण अर या से सबसे जादा बडु कारण बोण मा मानव कु जादा से जादा दखल च। आज विकासा नौं पर पाड़ मा बिना स्वच्या खुब विकास ह्वे। आज विकास नौं पर पाड़म सड़कियों कु जाल बिछिग्ये। विकासा नौं पर पाड़ मा बोणा की जिकुड़ि की चिरफड़ै कर ग्यायी। जै से बोण मा रैंण वला जानवरु का वास्ता जगा खतम ह्वेग्येन, जानवरु का वास्ता कंद-मूल अर छ्वटा जानवर कम ह्वेग्यीन। इल्लै बाघ अर रिख जन्ना शिकार करण वला जानवर गौं का नजीक ऐग्यींन। यीं कारण च कि आज आदिम अर बाघ बीच टकराव ह्वेग्ये। यु टकराव जतगा मनखि खुणि खतरनाक च उतगै बाघ खुणि बि च। अब अगर हमन ये टकराव तैं रवक्णा वास्ता अबि क्वीं फैसला नीं ल्यायी त आण वला सालु मा यु खतरा हौरि बि बढ़ि जालु।

आज बाघ कु आतंक से पाड़ तैं बचौंणा जिम्मेबरि वख रैंणा वलों की हि नीं च, बल या जिम्मेबरि हमरा सर्या समाजै अर सरकारै बि च, किलैकि अगर प्रकृति कु संतुलन टूटलु त यां कु असर हरेक मनखि तक पौंछलु। लोगु तैं बाघ से बचौंणा वास्ता बाघ मरण क्वीं समाधान नीं च, यां कु समाधान बाघ दगड़ि संतुलन अर दूरी बणौंण च किलैकि बाघ बि हमरि प्रकृति कु हिस्सा च। बाघक् कांधौं मा त बोण मा संतुलन बणौंणा जिम्मेबरि च। बाघ हमरा पाड़ खुणि खतरा ना बल बाघ हमरा पाड़ै सान बि छन। बाघ से पाड़ा रैवासियों की सुरक्षा तबि होलि जब जंगल अर मनखि द्विया एक दूसर जगा कु सम्मान करला, यीं समाधान च अर भवेष्य कु रस्ता बि च।

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