तृतीय स्वरूप : माँ चंद्रघंटा
“पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैयुता। प्रसादं तनुते मद्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।।” श्री दुर्गा का तृतीय रूप श्री चंद्रघंटा है। इनके मस्तक पर घंटे के
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Read more“दधना कर पद्याभ्यांक्षमाला कमण्डलम। देवी प्रसीदमयी ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥ श्री दुर्गा का द्वितीय रूप श्री ब्रह्मचारिणी हैं। यहां ब्रह्मचारिणी का तात्पर्य तपश्चारिणी
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Read moreपौराणिक मान्यता के अनुसार पितृपक्ष में पूर्वजों की आत्माएं धरती के सन्निकट होती हैं। ज्योतिषियों के अनुसार इस समय चंद्रमा,
Read moreरुद्रप्रयाग जनपद के मन्दाकिनी घाटी में गुप्तकाशी से 10 किलोमीटर की उत्तर पूर्व में प्रसिद्ध सिद्धपीठ श्री कालीमठ मंदिर है!
Read moreचमोली जिले में तिब्बत सीमा पर देश के अंतिम गांव माणा में आज भी सरस्वती की पूजा की जाती है।
Read moreरुद्रनाथ उत्तराखंड के चमोली जिले का एक जाना माना गाँव है। यह स्थान समुद्र तल से 2286 मीटर की ऊंचाई
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