बग्वाल का एक रूप ‘इगास’

UK Dinmaan उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पते।। त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्।। सन्दर्भ : यद्यपि भगवान् क्षणभर भी सोते

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