‘बरसुण्ड महादेव’

उत्तराखण्ड, पौड़ी जिलम पोखड़ा ब्लॉक म बरसुण्ड महादेव कु एक अलौकिक मंदिर च। बरसुंड महादेव मंदिर अपणा कुण्ड, अलौकिक शक्ति अर भक्तु की मनोकामना पूरी करणा का वास्ता प्रसिद्ध च। बरसुंड महादेव आस्था अर उत्तराखण्डा संस्कृति कु प्रतीक च।

बिगरैलु उत्तराखण्म मा बरसुण्ड द्यबता कु मंदिर पौड़ी जिलम ब्लॉक पोखड़ा मा च। चौदिसौं डाळौं का बीच ऐ मंदिर मा पौंछिकि बौत शांति मिलदि। मंदिरम पौंछिकि सबसे पैलि मंदिरा समणि न्येण वास्ता एक कुण्ड च।
बरसुण्ड मंदिरम बौत सर्या राज छुप्या छन, यामा एक राज यों बि च, ये कुण्डा खास राज यों च कि कुण्ड कु पाणि रंग दूद जन्नु च।

यख गौं का लोगु ब्लदन कि बौत साल पैलि कुण्ड कु पाणि कु रंग दूद जन छायीं अर यामा दूद जन्नि गंद बि औंदि छायीं पर अब जब बिटि लोगुन प्राकृति क दगड़ि छेड़ कायी तब बिटि कुण्डा पाणि कु रंग हल्कु ह्वेग्ये। लोगुन बतैकि जन्नि-जन्नि कुण्ड पाणि कु भोग करे जांद त कुण्डम पाणि कम हून्द अर कुछ हि बगत बाद कुण्डम पाणि दुबरा भ्वरें जांद, पर कैतैं अबि तक यु पता नीं च कि यु पाणि कुंडम कख बिटि आंद अर ये पाणि कु रंग दूद जन्नु किलै च?

बरसुण्ड महोदवा बारम एक कथा च कि कै सालु पैलि यख गौं का गोर चरण खुणि आंदा छायीं, चरण खुणि औंण वलि सबि लैन्दि गौड़ि कु दूद भगवान शिवन गुवेर बणिकि प्ये जांद छायीं। जै से घारम गौड़ि दूद नीं देंणि छायीं। एक दिन गौवलों न गोर कु पिछनै-पिछनै ग्ये अर देखि कि एक ग्वेरि दूद पींणु च। यु देखिकि गौ वलों न ग्वेर पर कुल्हणु मारि दे, ग्वेरा मुण्डा द्वी हिस्सा ह्वेग्यीन। वैका बाद वु ग्वेरन एक ढुंगु (शिव लिंग) बणि ग्यायी अर आज बि युु ढुंगु शिव लिंग) मंदिरम च।

यीं घटना बाद गौं का लोगु पर बरसंुड द्यबता कु दोस लगिग्यायी अर गौं मा खेती-पाति सबि सुखण लगिग्यींन। लोग बौत परेसान ह्वेग्येन त एक दिन एक पूजरि का स्वींणा मा बरसुण्ड द्यबता ऐन अर ऊंतै बतै कि वै ग्वेरा रुप मा यीं छायीं, अर गौं वळोन मि दगड़ि अन्याय कायी। अगर तुम अपणु दोस तैं हटाणु चाणा छा त जख मिन ढंुगु कु रुप धर्यूं च वखम मंदिर बणावा अर ये क्षेत्रम जु बि सुभ काम होलु त जन्नि कैकु ब्यो, कैका घार मा गौड़ि बियेलि त वीं गौड़ि कु दूद सबसे पैलि मितैं चढ़ये जालु।

पूजरि या बात गौं वलों तैं बतै त गौं वलों न वे दिन बिटि हि मंदिर बणाण कु काम सुरु कै दे अर शिवलिंग पर दूद चढ़ाणु सुरु कै दे। वै दिन बिटि सबि गौं वली सुखी-सन्ति ह्वेग्येन

ब्वदन कि यख जु भक्त सच्चु मन से आंद वैकि हरेक मनोकामना पूरी ह्वे जांद। बरसुंड द्यबता म जै बि भक्ता मनोकामना पूरि हुन्द वे यख अपणा नौं लेकिकि एक घंटी तैं चढ़ौंदन।

बरसुंड महादेव पोखड़ा बिटि 30 किलोमीटर दूर च। यख तक पौंछण खुणि कुण्जखाल तक गाड़ी मिलि जान्द। कुण्जखाल बिटि मंदिर पौंछण खुणि 2 किलोमीटरा उकाळ चढ़णा प्वडद। यख औंणा वाल भक्तु खुणि मंदिरम रैंणा पूरु बन्दुबस्त च।

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