एंजेल चकमाकि मौत : समाज कु नैतिक पतन
त्रिपुरा कु छात्र एंजेल चकमा की देरादूण मा मौत सिरफ एक छात्रै मौत नीं च, बल या घटना हमर समाज, शिक्षा व्यवस्था अर लोकतांत्रिक मूल्यों पर बि चोट च।
एंजेल चकमा फर नस्लीय टिप्पणी कु विरोध करण कारण हमला ह्वे। या बात बताैंणि च की हम असहमति अर समानता तैं मनण खुण आज बि त्यार नीं छौ। देवभूमि मा इन्नि घटना हमरि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता अर कानून व्यवस्था फेल हूंण कहाणि च।
देवभूमि उत्तराखण्ड मा खास कैकि देरादूण तैं शिक्षा कु केन्द्र मन्यें जांद। जख देस हि ना दुन्या बिटि छात्र पढ़णा खुणि औंदन। एंजेल चकमा बि इन्न एक छात्र छायीं, जु अपणा अर अपणा ब्वे-बुबौं का स्वींणा तैं पूरु करणा वास्ता देरादूण मा पढ़ै करणु छायीं।
देवभूमि मा सिरफ अपणि पछ्याण या नस्लीय अपमान कु विरोध करणा कारण एंजेल चकमा की मौत ह्वे या देवभूमि हि ना बल या बात सर्या समाज खुणि जरूर चिंतै बात च। एंजेल चकमा की मौत बतौंणि च की आज हमरा शैक्षणिक संस्थान बि चौतर्फा असहिष्णुता से घिर्या छन। इन्न त उत्तर-पूर्व बिटि औंण वला लोगु खुणि या क्वीं नै बात नीं च। कभि-कभि इन्न टिप्पणी मजाक का नौं फर बि करे जन्दिन। पर इन्न टिप्पणि भेदभाव अर अज्ञानता तैं हि बतौंन्दन, पर जब क्वीं इन्नु अपमान कु विरोध करदु त वै खुणि दिक्कत ह्वे जांद। किलैकि आज बि हमर समाजै पिड़ा त यांकी हि च की हमर समाजम आज बि चुप रैंण सिखै जांद अर ब्वलण वला तैं फुंदया समझे जांद। एंजेल चकमा दगड़ि बि इन्नि ह्वे, वैन अप्फु पर करि नस्लीय टिप्पणी कु विरोध करण की हिकमत कायी, अर इन्नु कैकि वै न क्वीं गलत नी कायी।
अब यखम सवाल त यौं च कि इन्नि स्थिति कनुकैकि पैदा ह्वै? अगर इन्नि टिप्पणी एंजेल चकमा फर पैलि बिटि हूंणि छायीं अर संस्थान अर प्रशासन चुप छायीं त या हम सब्यौं बौत बड़ी लापरवै च।
एंजेलै मौत बाद जांच आदेश अर भरोसु से कुछ नीं हूंण। यामा जु बि दोषि छन वु की गिरफ्तारी अर ऊतैं कड़ी सजा हूंण बौत जरुरी च। यां से समाजमा रैबार जालु कि नस्लीय हिंसा खुणि समाज मा क्वी जगा नीं च।
एंजेल चकमा तैं निसाब सिरफ कानून से हि ना बल सामाजिक संकल्प से बि हूंण चैंद कि असहमति तैं दब्यें नीं जालु अर कैथैं बि अपणि पछ्याण या विरोध करण की कीमत अपणि जिन्दगि दे कैकि नीं करण प्वाड़लि। किलैकि लोकतंत्रै आत्मा असहमति हि च। भेदभाव कु विरोध करणु संवैधानिक अधिकार हि ना बल नागरिक कु कर्तव्य बि च। अब अगर असहमति कु जवाब हिंसा से मिललु त या बात हमरि समझम ऐ जांण चैंद कि हमर समाजै नैतिक अर लोकतांत्रिक पतन तरफा जाणु च।
एंजेल चकमा क मौत हमतैं झिंज्वड़णि च। अब बगत च शैक्षणिक संस्थान बि नस्लीय भेदभाव का खिलाफ नीति त्यार कर्यां अर सिकैत करण पर झट कारवै कर्यां। यांका दगड़ि हमर समाज तैं बि स्वच्ण प्वाड़लु कि ‘अनेकता में एकता’ की बात करण वला हम, क्य विविधिता तैं स्वीकार करणा खुणि त्यार छौ? अगर नस्लीय अपमाना खिलाफ ब्वलण से कैकि जान चलि जांद, त यु समाजै नैतिक पतन कु संकेत च। अर अबि हम एंजेल चकमा दोषियौं तैं कड़ी सजा नीं द्यूला त आज आज सवाल एंजेल कु च, त भोळ क्वीं हौरि होलु।
