मंच शुद्ध पर विचार अशुद्ध
हल्द्वानिक् राम लीला मैदान मा आठ अगस्त खुणि कांग्रेस क राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली ह्वे। रैली खतम हूंणा बाद राजनीतिक भाषणों की अवाज कम ह्वेग्यायी पर यांका बाद मंच कु शुद्विकरणन एक इन्नु विवाद खड़ु कै द्यायी जैकि अवाज अब हल्द्वानी बिटि भैर निकलिकि सर्या देस मा सुणै दिंणि च।
श्रीराम सेनान् सफै द्यायी कि शुद्धिकरण कैकि जातिक कारण नीं ह्वे, बल शुद्धिकरण खड़गे क सनातन-विरोध बयान देंणा कु कारण ह्वे। संगठनन् यु बि बोलिकि ऊंकु मकसद कै जाति कु मान तैं ठेंस पौंछाण कु कतै नीं छायीं।
हाँ धार्मिक अनुष्ठान कैबि मनखि की आस्था कु विषय ह्वे सकदु। कै बि जगा मा पूजा करणु, हवन करणु वीं जगा तैं पवेत्र करणु बि धार्मिक स्वतंत्रता ह्वे सकद। पर जब क्वीं अनुष्ठान कै मनखि कु जाणा बाद करे जांद अर जैथे शुद्धिकरण ब्वलें जांद त खास कैकि जब वु मनखि देस की सबसे पूरणि पार्टी कु राष्ट्रीय अध्यक्ष च अर दलित हूयां। त यखम सवाल त खड़ा ही होला कि क्या राजनीतिक नेता कु कार्यक्रम खतम हूंणा बाद वीं जगा कु शुद्धिकरण करणु सै च?
यखम द्विया पक्षों का अपणा-अपणा तर्क ह्वे सकदन। ह्वे सकद की जौन यु हवन उर्यीं वुकु मकसद कैकि जाति कु अपमान करण नीं छायीं पर कै दलित नेता कु मंच बटि भाषण दंेणा का बाद मंच कु शुद्धिकरण समाज तैं क्य रैबार दिंद, ये सवाल से वु बचि नी सकदा। भारत न छुआछुत अर सामाजिक भेदभाव की बौत पिड़ा झेलीं च। समानता सिरफ संविधान कानून की पोथी मा हि असल मा बि हूंण चैंद।
यखम कांग्रेस तैं बि स्वचण चैंद कि हरेक सामाजिक विवाद फरं राजनीतिक करण क्य ऊंका वास्ता सै च या गलत।
त दूसर तरफा भाजपा तैं बि समझण प्वाड़लु कि सिरफ यु बोलिकि कि ऊंका ऐ आयोजन से क्वीं मतबल नीं च, विवाद खतम नीं ह्वे जांद। ये मामला मा भाजपा तैं बि साफ करण चैंद की जातिगत भेदभाव या कै मनखि तैं वेकी जाति देखिकि अपवेत्र मनणा की भारत देसम क्वीं जगा नीं च।
हल्द्वानी मा मंच कु शुद्धिकरण फर कांग्रेस अर भाजपा अमणि-समणि छन। यखम असल लैड़ कांग्रेस अर भाजपक बीच नीं हूंण चैंद। असल सवाल वीं मानसिकता कु च, ज्वा कै मनखि की कै जगा मा जाण से, वीं तैं अपवेत्र बतान्द।
धर्म आस्था च, राजनीति लोकतंत्र च अर संविधान सब्यौं तैं बराबर कु दर्जा दिंद। यु तिन्यौं तैं एक दुसरा का खिलाप खड़ा करण बजाय हमतैं तालमेल बणै की समाज तैं हौरि मजबूत बणौंण चैंद।
हल्द्वानी कु विवाद राजनीतिक दलु का वास्ता एक इमत्यान च। यखम सवाल यु नीं च कि मंच कु शुद्धिकरण करे ग्यायी, सवाल यो च कि ऐ शुद्धिकरण की राजनीति न हमर समाज तैं क्य रैबार द्यायी? अब अगर ऐ शुद्धिकरण से समाज मा यु रैबार गायी की कै मनखि की जाति, विचार अर राजनीतिक पछ्याण का कारण वैका जाणा बाद वीं जगा तैं शुद्ध करण प्वड़दु। त यखम नुकसान सिरफ एक नेता कु, एक पार्टी कु नीं च, बल यखम नुकसान वे सामाजिक विश्वास कु च जैंते बणौंण मा संविधान, समाज सुधारक अर पीढ़ियौं कु लम्बु दुन्द (संघर्ष) कायी।
