‘हरेला’ एक तिवार हि नी च, बल यु प्रकृति का वास्ता हमरि जिम्मेबरि बि चः मुख्यमंत्री धामी
मुख्यमंत्री धामिन परेड गिरौंड देरादूण मा उर्यूं हरेला कौथिग मा भाग ल्यायी।
एम मौका फर उन्न प्रदेस का रैवासियोें तैं हरेला पर्व की बधै द्यायी। उन्न बोलि कि हरेला उत्तराखण्ड कु लोग परंपराऔं कु एक बडु तिवार च, जु समाज का सबि लोगु तैं ज्वड़णा कु काम करदु।
मुख्यमंत्रिन बोलिकि लोक संवर्धन कौथिग का जरिया प्रदेस की लोक संस्कृति, परंपर अर लोक कला तैं एक नै पछ्याण मिलणि च। उन्न लोक गीतार गढ़ रत्न नरेन्द्र सिंह नेगी का बारम बोलिकि उन्न अपणा गीतु से उत्तराखण्ड की संस्कृति अर पर्यावरण, ब्यटुळों की दुन्द (संघर्ष) तैं सर्या दुन्या तक पौंछणा कु काम कायी।
मुख्यमंत्रिन बोलिकि हरेला सिरफ एक तिवार हि नी च, बल यु प्रकृति का वास्ता हमरि जिम्मेबरि बि च। हमरा पूरणौं न पाणि, बोण अर जमीन बचौंणा कु महत्व तैं पैलि हि समणि याली छायीं। आज जब सर्या दुन्या जलवायु परिवर्तन अर पर्यावरण की चुनौती से परेसान च, तब उत्तराखण्ड हरेला तिवार, सर्या दुन्या तैं पर्यावरण बचौंणा कु रैबार दिंणु च।
उन्न बोलिकि ऐसु साल हरेला तिवार पर 10 लाख डाळा लगौंणा की सौं लियीं च। उन्न बोलिकि हरेक डाळु औंण वलि पीढ़ि का सुरक्षित भवेष्य अर प्रर्यावरण तैं बचौंणा सरकार पैलि कोसिस च।
मुख्यमंत्री प्रदेसा रैवासियों से या विनति कायी कि हरेला मा सबि अपिण जिम्मेबरि समझि की काम कर्या अर एक डाळु अपणि ब्वे कु नौं से जरुर लग्यां अर वै तैं सैंतणा (पालने) की सौं बि लिया। उन्न बोलिकि ऐ अभियान क जरिया उत्तराखण्ड मा द्वी करोड़ डाळा लगौंणा लक्ष्य च, जैमा अबि तक हमन 1 करोड़ 15 लाख डाळा लगै दींन।
मुख्यमंत्रिन बोलिकि लोक संवर्धन तिवार प्रदेस क लोक कलाकार, शिल्पकार, बनुकर, हस्तशिल्प अर खाणु बणौंण वला कामगारू का तैं अगनै ल्याणा कु माध्यम च। यां से यु सब्यौं तैं अनगै बढ़णा कु एक नै मौका मिललु अर उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति तैं देस अर दुन्यम नै पछ्याण मिललि।
