विकास फर तिड्वाळ: देरादूण-दिल्ली एक्सप्रेसवे मा लापरवै
देसा मा आधारभूत ढांचा कु निर्माण विकास की पछ्याण मनि जांद। एक्सप्रेसवे, सुरंग, पुळ अर राजमार्ग न सिर्फ आर्थिक प्रगति का वाहक छन, बल जनता का बिस्वास का प्रतीक बि छन। इन्न मा देरादूण-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर सड़क धँसण अर कखि तिड़वाळ (दरार) औंणा की खबर बौत चिंता की बात च।

दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे कु उद्घाटन 14 अप्रैल 2026 खुणि देसा का प्रधानमंत्रिन करि छायीं अर जैथें उन्न नै इंजीनियरिंग कु बेहतरीन उदाहरण बतै छायीं। अब अगर इन्न मा सड़क धँसण अर पिलरों पर तिड़वाळ औंणा की खबर समणि औंणि च, त यू खराब निर्माण सामग्री अर देख-रेख मा लापरवै कु नतीजा च। यू सिर्फ एक परियोजना की कमी नी च, बल यू वीं पूरी व्यवस्था पर बि सवाल च, जु करोड़ों रुप्यौं से बणण वळी परियोजना की गुणवत्ता तय करणा कु दावा करदि। जनता तैं यु जणणा कु पूरा हक च कि आखिर इन्नु किलै ह्वे अर भवेष्य मा इन्न ना ह्वै, यांका वास्ता क्य करे जालु?
यांका वास्ता एक सहायक राजमार्ग अभियंता तैं बर्खास्त करे ग्यायी च। पर क्या कैकु निलंबन या बर्खास्तगी यांकु पक्कु हल च? कतै नी! अबि त सबसे जादा जरुरत यांकी च कि ये मामला मा निष्पक्ष जांच करे ज्या अर कैकी गलती च, या पता करे ज्या। ठेकादार, सलाहकार या फेरि काम की देख-रेख करणि वळी संस्थान, जु बि दोषी च, वैका खिलाफ सख्त कार्रवाई करे ज्यां। जिम्मेबारी सिर्फ सरकारी अफसरों तक ही नी रैंण चैंद।
अज्काल देसम इन्नु हूंणू च कि उद्घाटन का बग्त काम की खूब तारीफ करे जांद। पर बाद मा जब क्वीं तकनीकी कमी समणि औंद, त वैकी समीक्षा नी हूंदि। या आदत हमतैं बदलणि प्वड़ली। विकास कु मतलब सिर्फ परियोजना कु उद्घाटन नीं हूंद, बल वु लम्बू बग्त तक चलण वळी, मजबूत अर सुरक्षित बि हूंण चैंद। यीं घटना मा एक बड़ी सीख या च कि इन्न निर्माण कामों मा ऑडिट अर गुणवत्ता परीक्षण तैं और जादा मजबूत बण्यें ज्यां।
परियोजना तैं बग्त पर पूरी करणा की जल्दी मा कबि बि गुणवत्ता से क्वीं समझौता नीं हूंण चैंद। किलैकि विकास कु मतलब सिर्फ नै परियोजना बणौंण नी च, बल इन्नु निर्माण च, जु जनता कु विस्वास अर सुरक्षा का सबि मानकु तैं पूरू कर्यां। या से हि हूंद विकसित देसा की पछ्याण।
