माँ मनसा देवी

नागेंद्रवाहिनीं देवीं सर्वविद्याविशारदाम्।
नागयज्ञोपवीतां च नागयज्ञप्रियां तथा॥
कश्यपकन्यां मनसां साश्रिणां शरणागताम्।
नागभयनाशनीं वन्दे मनसादेवीमहं॥

माँ मनसा देवी कु मंदिर हरद्वारम हिमालया की दक्षिणी पर्वत श्रृंखला, शिवालिकि पाड़म बिल्वा पाड़ मा च। हरद्वारा पंच तीर्थों मा यु मंदिर बिल्वा तीर्थ कु नौ से बि जणि जांद। ब्वलें जांद की यख माता का दर्शन करण वलों की इच्छा मा पूरि करदि।

ब्वलें जांद की नाग वासुकी की एक बणि छायीं जैकु नौ मनसा छायीं। मनसा मतबल मन की इच्छा पूरि करण वलि।

मनसा देवी मंदि धार्मिक महत्व
बवलें जांद की जब भगवान विष्णु कु रथ तैं गरुड़ लिजाणु छायीं, तब गलति से हरद्वार की चार जगो मा अमृता की बूंद गिर ग्यायीं।

पौराणिक कथा अर परम्परानुसार देवी पार्वती का द्वि रूप मनसा अर चड़ी एक दूसरा नजीक रैंदन। यीं कारण च कि माँ चंडी अर माँ मनसा द्विया एक-दूसरा अमणि-समणि छन।

माँ मनसा देवी की महिमा
मनसा देवी मंदिरा गर्भगृहम द्वी मूर्ति छन। एक मूर्ति की पाँच हत्थ (भुजा) अर दूसर मूर्ति क आठ हत्थ छन पर मुख तीन हि छन।

मंदिरा बारम एक हौरि किंवदंती च एक गौड़ि हरेक दिन तीन शिला तैं दूद देंदि छायीं। एक दिन एक मनखि न यु सबि देखि, जैका बाद लोग यख पूजा करण बैठिग्यी। यख इन्नु बि मन्यें जांद की माता सती कु माथा यखि गिरी छायीं।

माया देवी अर चंडी देवी मंदिरा दगड़ि यीं तीन मंदिर हरद्वारा तीन पीठ छन।

हरद्वारम मा मनसा देवी की मंदिर सर्या दुन्यम बौत प्रसिद्ध च। ऐ सिद्धपीठा बारम मान्यता च कि यख जु सि सच्चु मन से आंद वै भक्ता की हरेक इच्छा माँ पूरि करदि।

मंदिरम औंण वला भक्त एक डाळा पर धाग बंधिकि अपणि मनोकामना पूरि करणा वास्ता माँ की प्रार्थना करदन अर अपणि मनोकामनापूरि हूंण बाद धागु ख्वला खुणि औंदन। माँ मनसा तैं खुस करणा वास्ता यख नर्यूळ, फल-फुल चढ़िऐ जंदन।

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