माँ सुरकंडा देवी
या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
माँ सुरकंडा देवी कु वास टिरी जिलम धनौल्टी का नजीक सुरकुट पर्वतम च। यु इक्कावन शक्ति पीठुम बटि एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ च। माँ सुरकंडा कु मंदिर 2757 मीटर ऊंचै पर स्थित माँ दुर्गा कु मंदिर च।

केदारखण्ड व स्कंद पुराणा नुसार राजा इंद्र यख माँ सुरकंडा की पूजा कै कायी।
पौराणिक मान्यता च कि राजा दक्ष जब हरद्वारम एक यज्ञ उर्याईं त उन्न यज्ञ मा अपणि नौनि सती अर भगवान शिव तैं न्यूतो नीं द्यायीं। माता सती बिना न्यूत्यां यज्ञ मा पौंछिग्यायी।
यज्ञम माता सती न जब देखि कि वख ऊंका जवैं भगवान शिवजी खुणि क्वीं जगा नीं च, त नराज माता सतीन यज्ञ खुणि बण्यूं हवन कुण्डम फाल मारि द्यायी अर कुण्ड मा समैग्ये। या बात जब भगवान शिव तैं पता चलि त उन्न राजा दक्ष तैं मरणा वास्ता अपणा गणु तैं भेजि। भगवान शिव का गण राजा दक्ष कु यज्ञ तैं छिन-भिन कै द्यायी।
भगवान शिव हवन कुंड बिटि माता सती कु शरैल तैं अपणा कांधम धैरि अर अगास म भटकण बैठिग्येन। यीं घटना बात सर्या सृष्टि हिलण बैठिग्ये। भगवान शिव कु यु क्रोध देखिकि सबि द्यबता भगवान विष्णुम गैनी। तब भगवान विष्णु अपड़ा चक्र से माता सती का शरैल 51 कतर कै दीं। जै मा बटि माता सती कु मुण्ड (सिर) यख गिरि। इल्लै ऐ पाड़ तैं सुरकुट त माता कु मंदिर कु नौं सिरखंडा पोड़ि ग्यायी। जु अब सरकुंडा देवी या सुरखंडा देवी नौं से जणे जांद।
सुरकंडा देवी मंदिरा एक हौरि खास बात च। यखक रौंसली का लाब (पत्ता) प्रसादम दिऐ जंदन। रौंसली लाब म खुब दवै का गुण हूंदन। धार्मिक मान्यता च यु पात तैं घारम रखण से जस (समृद्धि) आंद। ऐ डाळु तैं देववृक्ष बि ब्वलें जांद।
इन्न त यख सर्या साल भक्त माँ का दर्शनु खुण आंदन पर गंगादर्शन अर नवरात्रम माँ का दर्शनु कु खास महत्व च। माँ सुरकंडा क दर्शन से सबि कष्ट दूर ह्वे जन्दन।
