शक्तिपीठ माँ कुंजापुरी
“या देवी सर्व भूतेशु शक्ति रूपेण संशतः
नमोतस्ये नमोतस्ये नमोतस्ये नमो नमः”
कुंजापुरी एक प्रसिद्ध शक्ति पीठ च। माँ कुंजापुरी देवी दुर्गा कु मंदिर च। टिरी गढ़वालम 1676 मीटर ऊंचै पर बण्यूं कुंजापुरी मंदिर शिवालिक पर्वतमाला का तेरह शक्तिपीठुम एक च। कुंजापुरी माता सती क कंजु (ऊपरी भाग) गिरण से बण्यूं च।

ब्वलें जांदा की राजा दक्ष की नौनि सती कु ब्यौ भगवान शिवजी दगड़ि ह्वे। राज दक्ष तैं यु ब्यो पसंद नीं छायीं। दक्षन एक यज्ञ उर्याईं अर यज्ञ मा अपणि नौनि सती अर भगवान शिव तैं न्यूतो नीं द्यायीं।
सती न यज्ञम जाणा वास्ता भगवान शिव से आज्ञा मांगि, त भगवान शिवन माता सती तैं यज्ञम जाण से मना कै द्यायी। पर जब माता सतीन यज्ञ मा जाणै जिद कायी त भगवान शिवन जाणा की मंजूरि दे द्यायी।
माता सती जब यज्ञ मा पौंछि त माता सती न वख देखिकि यज्ञ मा शिवजी का बैठणा वास्ता क्वीं जगा नीं च। अपड़ा जवैं (पति) की या बेजति माता सती से बरदास्त नी ह्वे। अर माता सती न उबरि हि यज्ञ खुणि बण्यूं हवन कुण्डम फाल मारि द्यायी अर कुण्ड मा समै ग्ये। या जब बात भगवान शिव तैं पता चलि त उन्न राजा दक्ष तैं मरणा वास्ता अपणा गणु तैं भेजि। भगवान शिवक गणुन राजा दक्ष कु यज्ञ तैं छिन-भिन कै द्यायी अर राजा दक्ष कु मुण्ड तैं काटिकि भगवान शिव का समणि लेकैकि ऐ ग्येन। भगवान शिव कु यु क्रोध देखिकि सबि द्यबता भगवान शिव से माफी मंगण लगिन। जै फर भगवान शिव शांत ह्वेग्यीन अर उन्न दक्ष तैं जीवन दान अर यज्ञ पूरू करण मंजूरि द्यायी।
भगवान शिव हवन कुंड बिटि माता सती कु शरैल तैं अपणा कांधम धैरिकि अगास म धूमण लगिग्येन। यीं घटना बात सर्या सृष्टि हिलण बैठिग्ये। यीं घटना बाद सबि देव भगवान विष्णु क यख पौंछिन अर भगवान विष्णु से यी समस्या कु हल करणा की विनति कायी। तब भगवान विष्णु न अपणा चक्र से सती क शरैल कत्तर-कत्तर (टुकड़े) कै दींन। सती कु शरैला कत्तर जख-जख पोड़िन वख-वख शक्ति पीठ बणिन। जैमा कुंजापुरी बि एक शक्तिपीठ च।
कुंजापुरी बिटि स्वर्गारोहिणी, बंदरपूँछ, चौखंबा और भागीरथी घाटी गंगोत्री, ऋषिकेश, हरद्वार दिखेन्दन।
माँ कुंजापुरी यख औंण वला हरेक भक्तु की मनोकामना पूरी करद। माता क यख बारमास भक्तिु की भीड़ लगि रैंन।
