नेपाल : सत्ता अर व्यवस्था फर जेन-जेड कु कुरोध

हिमालय की खुचळिम बस्यूँ नेपाला पछ्याण सर्या दुन्या मा सांस्कृतिक विधिधता से च पर अज्काल नेपालम खुब खलबलि मची च। नेपालन जेन-जेड न जमजमी (स्थिर) सरकार तैं चुनौती हि न द्यायी बल एक नै चेतना तैं बि जनम द्यायी।

नेपालम जेन-जेड कु यु आंदोलन केवल सरकारा खिलाप नीं च, बल यु आंदोलन एक सरकरि बन्दुबस्तक् खिलाप च, ज्वां सालु बिटि ज्वानु क अवाज तैं दुबौंणा छायीं। नेपालम अबरि राजनीतिक अर सामाजिक संकटा दौर च।

देसा राजधानी काठमांडू से लेकैकि दूर तोक तक जेन-जेड आंदोलनन सर्या सरकार कुर्सी बिटि भ्वां चुल्ये दे। यु सिरफ जेन-जेड ज्वानु कु आंदोलन सड़कियां मा हि नी छायीं बल यु आंदोलन संसद भवन भितरतक घुसि ग्यायी। सरकार खिलाप यु गुस्सा केवल सोशल मीडिया बन्द करणा की नराजगी हि नीं च, बल यु आंदोनल सरकार मा बैठ्या लोगु क खिलाप जन विद्रोह च।
नेपालम या लड़ै द्वी पीढ़ि क बीचा लड़ै च। जेन-जेड देसा सत्ता मा अपणि भागीदारी बि चाणा छन, जै से वु अपणि दिक्कतु तैं सरकार तैं बतै सक्यां। नेपाल कु यु गुस्सा बेरुजगार, मैंगै अर भ्रष्टाचारा खिलाप च।

नेपाला ज्वान नौना पढ़ै अर नौकरि का वास्ता भैर देस मा धक्का खाणा छन। नेपालन पलायन सबसे बड़ी दिक्कत च। नेपालन जेन-जेड की लोकतंत्र बिटि भरोसु उठिग्ये। अब नेपाला रैवासी दुबरा राजशाही की मांग करणा छन।

नेपालम बेरुजगारी दर 10.71 प्रतिशत, मैंगे 5.2 प्रतिशत। नेपाला 20 प्रतिशत लोगु मा 56 प्रतिशत जैदाद च। कुर्सी म बैठ्या नेताओं क नौन्यालु विदेशम पढ़ै करणा छन, ऊंका रंग ढंग, शान सौकत सोशल मीडिया म खुब वायरल हूंणा छन।

नेपालम लगभग 55000 करोड़ रुप्यौं कल गिरी बंधु भूमि घोटाल, 14,000 करोड़ रुप्यौं कु ओरिएंटल कोऑपरेटिब घोटाला अर 70,000 करोड़ रुप्यौं कु सहकारिता घोटाला क अलावा वीजा, टेलीकॉम, पोखरा एयरपोर्ट जन्न घोटाला खुब चर्चा मा छन। यां से नेपाला युवा नराज छन। ज्वान नौन्यालु कु गुस्सा कु बडु कारण हि यौ च। ऊंका मुद्दा अर मांग बि सै छन।
यांका बाद बि जेन-जेडन जु हिंसक विद्रोह कायी समाज वै तैं कबि स्वीकार नीं करालु। नेपालम हलात इतगा खराब छन कि युवाओं पैल्यक प्रधानमंत्री क घरवळि तैं बि आग लगै दे, ऊंकु क्य कसूर छायीं। वित्त मंत्री तैं त खुब भगै-भगै पिटै कायी।

यीं सबि जन प्रतिनिधि छायीं अर यीं जनतन ऊंतै जनादेश दे छायीं। अब सवाल यौं च कि यीं बि भ्रष्ट छायीं त ऊंका खिलाप आंदोलन करै जै सकद छायीं इस्तीफा की मांग करै जै सकदि छायीं। सरकरि सम्पति तै जगै कि कतै क्य मिललु? यु त अपडु हि नुकसान च। आखिर संसद भवन, देसा एतिहासिक सांस्कृतिक अर राजनैतिक पछ्याण सिंह दरबार तैं नुकसान पौंछ्णु कतै सै नीं च। देसम लोगु दसा खराब ह्वे सकद, सरकार से नराजगी ह्वे सकद पर स्वाचा यांका वास्ता क्वीं बि संस्थान दोषी कनुकैकि ह्वे सकद।

अब बडु़ सवाल च कि क्य यां से भुखमरी, मैंगे कम होलि, क्य या से रुजगार मिललु, क्य नेपालम भ्रष्टाचार खतम ह्वे जालु। अब अगर देसम क्वीं बि नै सरकार बणलि, ह्वे सकद यामा यीं युवा बि होला, जु आज आंदोलन करणा छन। तब यु युवा कख बैठिकि देस तैं चलौंणा वास्ता कानून बणाला, कख बटिकि मुद्दों अर समस्या तैं हल कारला?

अब सबसे बडु सवाल नेपाल समणि यौ च कि अबरि या सरकार त फैल ह्वेग्ये त क्या औंणि वलि नै सरकार ठरठरा युवाओं की दिक्कतु कु हल कै साकली? क्य बेरुजार, पलायन दिक्कत कम ह्वे जाली। क्या जवानु तैं तागत तैं सै दिसा दे साकली?
अबि या या सबि छ्वीं बत्थ भवेष्य गर्भ मा छन। हाँ सरकार/ व्यवस्था से नराजगी वास्ता जनता तैं आंदोलन कु हक च पर अपड़ा नेतऔं का दगड़ि मार-पिटै कतै सै नीं च। लोकतंत्र तैं बचौंणा अर देसा व्यवस्था तैं हौरि कुटकुटु बणौंण कु बाटु बातचीत अर ठोस नीति से हि निकलि जाण चैंद ना हि हिंसा कैकि, अर फिर कु सै च अर कु गलत यांकु फैसला करणा वास्ता न्यायालय छन।

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