हिमालय सर्या भारतीय उपमहाद्वीप कु जिंणा कु अधार च : धामी
हिमालय सिरफ बरफा चुफलि (चोटी) अर पर्वतमालाऔं कु समूह न बल यु सर्या भारतीय उपमहाद्वीप कु जिंणा कु अधार बि च। या बात प्रदेसा मुख्यमंत्री धामिन आईआरडीटी सभागार मा उर्यूं हिमालय दिवसा कार्यक्रम मा बोलि।
मुख्यमंत्रिन बोलि कि हिमालय सिरफ उत्तर भारत कु पैरादार (चौकीदार) ही नी च बल हिमालय बिटि निकलण वला गदना सर्या देसा जिन्दगी बि छन।

मुख्यमंत्रिन बोलि कि हिमालय कु ऊंचा टुकु, ग्लेशियर, गदना अर जैव विविधता का रौत्याला बोण पर्यावरण संतुलन बणौंणा मा मदत करदन। उन्न बोलि एक तरफां हिमालय बिटि निकलण वळा गदना देसा करोडु लोगु कि पीस बुझौंदन, त वखि यख मिलण वलि जड़ी बूटी आयुर्वेद कु अधार बि छन।
मुख्यमंत्रिन बोलि आज हमरि यीं धरोहर तैं खतरा पैदा ह्वेग्ये। खळाखळ बदलि हूंणि जलवायु, बेढ़ग कु विकास, अर आंखा बुझिकि प्राकृतिक संसाधनु कु दोहन हिमालय कु संतुलन तैं खराब करणु च। ग्लेशियर पिघलणा छन, जु औंण वला बगत मा पाणि कु दिक्कत पैदा ह्वे सकद।
मुख्यमंत्रिन बोलि कि हिमालयी क्षेत्रम बरखा की तीव्रता खळाखळ बढ़दै जाणि च अर बदल फटणा, भूस्खलन जन्नि घटना बार बार हूंणि छन। मुख्यमंत्रिन बोलि कि हमरु प्रदेस प्राकृतिक आपदा झय्लणु च। यांका वास्ता हमतैं वैज्ञानिक संस्थानु अर जणगुरुऔं का बीच तालमेल बणौंणु बौत जरुरी च। मुख्यंत्रिन बोलि कि इल्लै हमन पिछल साल उच्च स्तरीय समिति बणै छायीं अर ऐसु मंगसीरा मैना मा प्रदेसम जलवायु परिवर्तन पर ‘विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन’ उर्यें जाणु च।
मुख्यमंत्रिन बोलि कि हिमालय तैं बचौंणु केवल सरकार कु काम हि नी च, बल यु काम देसा हरेक मनखि की जिम्मेबरि बि च। उन्न बोलि कि हमतैं पर्यटन तोकम बि पर्यावरण बचौंणा तरफां बि टक लगौंण प्वाड़लि किलैकि खळाखळ बेढ़गा पर्यटन हिमालय कु पर्यावरण तैं नुकसान पौंछाणु च। यांका वास्ता हमतैं ‘सस्टेनेबल टूरिज्म’ तरफा ध्यान देंण प्वाड़लु। जै से पर्यावरण तैं क्वीं नुकसान नी हूंयां, इन्नु पर्यटन कु विकास करै जै सक्यां। उन्न बोलि कि ये काम मा हिमालय क्षेत्रम रैंण वला लोगु अगनै औंणु प्वाड़लु। ऊंका ज्ञान, परंपरा अर जिन्दगि जिणा तरीका हमतैं सिखौन्दन कि कनुकैकि हम प्रकृति दगड़ि तालमेल कैकि जिन्दगि जी सकदौ। छ्वटि-छ्वटि कोसिस, जन्नि पाणि बचौंणा, डाळा लगौंणा अर प्लास्टिक कु कम से कम इस्तमाल करणु, हिमालय तैं बचौंणा काम कै सकदन। मुख्यमंत्रिन बोलि सरकारन द्वी से नौ सितम्बर तक हरेक साल हिमालय जनजागरुकता हप्ता मनौंणा कु फैसला ल्यायी।
